बुधवार को भारतीय टीम के पूर्व कप्तान अजित वाडेकर का रात में मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल में निधन हो गया. 77 वर्षीय वाडेकर लम्बी बीमारी का शिकार थे.
वाडेकर के निधन की खबर ऐसे समय आयी है जब भारतीय टीम इंग्लैंड में संघर्ष करती हुई नजर आ रही है. अंग्रेजों की धरती पर भारतीय टीम ने पहली बार वाडेकर की कप्तानी में ही सीरीज अपने नाम की थी.
जब भारत को मिली इंग्लैंड में जीत
1 अप्रैल 1941 को जन्मे वाडेकर ने 1966 में भारत के लिए पहला टेस्ट खेला था. जब भारतीय टीम ने 1971 में इंग्लैंड दौरा किया था तब टीम की कमान वाडेकर के हाथों में थी. इसी दौरान टीम इंडिया ने पहली बार इंग्लैंड में सीरीज पर कब्ज़ा जमाया था.

वाडेकर हर काम को अपने अलग अंदाज़ से किया करते थे. जब उन्हें टाइगर पटौदी से कप्तानी मिली तो उन्होंने एक नए तरीके से टीम का नेतृत्व किया.
कुछ वर्ष पहले वाडेकर ने एक इन्टरव्यू के दौरान बताया था कि जब उन्होंने नवाब से कप्तानी हासिल की थी. तब नवाब एक लीजेंड बन चुके थे. वाडेकर ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि उन्हें 1971 में वेस्टइंडीज के दौरे के लिए टीम में चुने जाने की उम्मीद नही थी. उन्होंने टाइगर से कहा था कि भरोसा दिलाइये कि मैं टीम में हूं.
पहली बार विदेशी धरती पर मिली सीरीज में जीत
इसके बाद वाडेकर का वेस्टइंडीज दौरे के लिए ना सिर्फ चयन हुआ बल्कि कप्तानी भी सौंपी गयी. वाडेकर ने शानदार नेतृत्व करते हुए जबरदस्त खिलाड़ियों से सजी वेस्टइंडीज की टीम को मात देकर भारत को पहली बार विदेशी धरती पर सीरीज में जीत दिलाई थी.
वेस्टइंडीज के बाद भारत ने इंग्लैंड दौरा 1971 में ही किया. आत्मविश्वास से भरी भारतीय टीम ने इंग्लैंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए वाडेकर की कप्तानी में पहली बार अंग्रेजों की धरती पर सीरीज में जीत हासिल की.

हालांकि भारत को दो ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले अजित वाडेकर की कप्तानी का अंत अच्छा नही रहा. 1974 में भारतीय टीम को इंग्लैंड में 0-3 से हार का सामना करना पड़ा. जिसमें 43 रनों पर ऑल आउट होने की शर्मनाक हार भी शामिल है. वाडेकर ने इस पर सफाई देना उचित नही समझा था और 33 वर्ष की उम्र में संन्यास की घोषणा करदी थी.
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