6 महीने के अंदर 2014 में जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए दो चीज़ें अच्छी हुई थीं. पहली, परवेज रसूल जम्मू-कश्मीर से भारतीय टीम में खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने थे. परवेज़ ने 15 जून 2014 को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मैच में टीम इंडिया में डेब्यू किया था. दूसरी, जम्मू-कश्मीर ने मुंबई को वानखेड़े स्टेडियम में रणजी मैच में एक करारी हार दी थी. यह जम्मू-कश्मीर की एक अभूतपूर्व जीत थी.
वहीं परवेज रसूल ने जब भारत के लिए खेला तो सोचा था कि जम्मू कश्मीर क्रिकेट के लिए चीज़ें बदल जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ. रसूल ने कहा ”जब मैंने भारत के लिए खेला था तो सोचा था कि जम्मू-कश्मीर के लिए कुछ अच्छी चीज़ें होगी और सुविधाओं में इजाफा होगा. हमने मुंबई को मुंबई में भी हराया था. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. इसका सबसे बड़ा कारण तैयारी में कमी है”

रसूल ने कहा ”पिछले वर्ष हम जयपुर रात में 11 बजकर 30 मिनट पर पहुंचे थे और हमें अगले ही दिन मैच खेलना था. यह ख़राब तैयारी को दिखाता है.”
अगले सीजन से पहले जम्मू-कश्मीर ने जमकर तैयारी की है. मेंटोर के रूप में उन्हें इरफ़ान पठान का अच्छा साथ मिला है. रसूल इतिहास में पहली बार जम्मू-कश्मीर की अच्छी तैयारी मान रहे हैं. उन्होंने कहा
”इतिहास में पहली बार हमारा एक पूर्ण रूप से प्रीसीजन रहा. जून से हमारा कैम्प चल रहा है. इरफ़ान का अच्छा साथ मिला. पहली बार हम बाहरी टीम(उत्तर प्रदेश) को भी लाने में सफल रहे और चार अभ्यास मैच खेले.”

आगे रसूल ने कहा ”तैयारी अच्छी रही. पिछले 6 महीने में काफी सुधार हुआ है. मैं बहुत खुश हूं कि आखिरकार चीज़ें बदल रही हैं. कुछ नए प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी आ रहे हैं. अब यहां क्रिकेट के लिए अच्छा वातावरण है.”
रसूल ने 66 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं. जिसमें उन्होंने 2.93 की इकॉनमी से 196 विकेट लिए हैं. इस दौरान एक पारी का उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 41 रन देकर 7 विकेट निकालना रहा. वहीं एक मैच में वह 11 विकेट ले चुके हैं.
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