1954-55 में तमिलनाडु को पहली रणजी ट्रॉफी दिलाने वाले एमजी बवनारयणन का आज(गुरुवार) निधन हो गया. वह 90 वर्ष के थे. उनकी देखभाल उनकी पत्नी तीन बेटे और एक बेटी कर रहे थे. वह क्रिकेट में बावा के नाम से जाने गए. तमिलनाडु में क्रिकेट को विकसित करने में उनका अहम योगदान रहा है.
बावा ने पांच रणजी मैच तमिलनाडु के लिए खेले हैं. 1987-88 में जब तमिलनाडु ने दोबारा रणजी ट्रॉफी का टाइल जीता तो उस दौरान बावा राज्य क्रिकेट के चयनकर्ता थे. 1953 में उन्होंने एमजे गोपालन ट्रॉफी में मद्रास के लिए सेलोन के खिलाफ खेला था. इस दौरान उन्होंने पहली पारी में सर्वाधिक रन बनाते हुए 71 रनों की पारी खेली थी.

वह एक मध्यक्रम बल्लेबाज, सीम गेंदबाज और जबरदस्त फील्डर थे. तमिलनाडु में वह कई क्रिकेट क्लब्स के साथ जुड़े हुए थे. तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन ने क्रिकेट के विकास को लेकर किए गए उनके योगदान को याद करते हुए उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है.
तमिलनाडु क्रिकेट बोर्ड द्वारा शोक व्यक्त करते हुए कहा गया कि ”एमजी बावानारायणन ने शहर और जिलों में विशेष रूप से कांचीपुरम जिला क्रिकेट एसोसिएशन में खेला और विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है.”
वहीं पूर्व लेग स्पिनर वीवी कुमार ने कहा ”बावा एक शानदार मीडियम तेज गेंदबाज थे. वह बल्लेबाजों की कमजोरी का फायदा उठाते थे. बल्लेबाज के रूप में वह एक रक्षात्मक थे, लेकिन बाद में अच्छे स्ट्रोक्स खेलने की क्षमता भी रखते थे.तमिलनाडु और पोर्ट ट्रस्ट के लिए कठिन परिस्थितियों में वह अच्छी बल्लेबाजी किया करते. वह हमारे पास अच्छे कवर फील्डर्स में से एक थे”
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