खेल डेस्क। भारत में क्रिकेट एक लोकप्रिय खेल हैं, जिसकी वजह से यहां लगभग हर व्यक्ति क्रिकेट की समझ रखता हैं। क्रिकेट को हर तरीके से भारत में प्रमोट किया जाता रहा हैं। भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि, आज विश्व क्रिकेट में 'भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड' सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड हैं। इंडियन प्रेमियर लीग जैसी प्रतियोगिता भी भारत में क्रिकेट के बुखार को चढ़ाने में कामयाब हुई हैं।
क्रिकेट के अलावा देश में खेल के जानकारों और प्रबंधकों को अन्य खेलों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता हैं। अन्य खेलों पर ध्यान नहीं देने की वजह से देश के कई ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जो आज गुमनामी की जिंदगी जीने को मज्ब्बूर हैं। आज के इस लेख में हम एक ऐसे खिलाडी की बात करेंगे जिन्होंने देश के लिए नेशनल स्तर पर मेडल जीते हैं। हम बात कर रहे हैं, पैरा-स्प्रिंटर मनमोहन सिंह लोधी की। जो 2009 में हुई एक दुर्घटना में अपना एक हाथ गंवा बैठे।
मनमोहन सिंह लोधी इस वक्त भोपाल की सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर हो चुके हैं। मनमोहन नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव तहसील के कंदरापुर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने भारत के लिए नेशनल स्तर पर कई पदक जीते हैं, जिनमें से साल 2017 में अहमदाबाद में 100-200मीटर स्प्रिंट में हासिल किया सिल्वर मेडल भी शामिल हैं। इस मैडल के बाद ही मध्यप्रदेश सरकार ने मनमोहन सिंह लोधी को सर्वश्रेष्ठ पैरा-ऐथलीट का भी इनाम दिया था।
साल 2009 में मनमोहन अपना एक हाथ गँवा बैठे थे। भीख मांगने को मजबूर हुए इस एथलीट ने राज्य सरकार पर आरोप लगाए हैं कि, राष्ट्री स्तर पर पदक जीतने के बाद उनसे नौकरी देने का वादा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ हैं। उन्होंने कहा कि, मैं खुद सीएम से चार बार मिल चुका हूँ लेकिन मेरी आर्टिक स्तिथि अच्छी नहीं हैं। यदि सरकार मेरी मदद नहीं करती हैं तो मुझे इसी प्रकार सड़कों पर भीख मांगकर परिवार चलाना होगा।
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