इंटरनेट डेस्क। इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में संपन्न 18वें एशियाई खेल में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के शॉट पुटर तेजिंदर पाल सिंह तूर पर सोमवार की शाम दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गोल्ड मेडल विजेता तेजिंदर पाल सिंह के पिता पिछले दो साल से कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। गोल्ड मेडल जीतकर तेजिंदर पाल सिंह अपने पिता को किए वादे को पूरा करने के लिए गांव जा रहे थे। लेकिन रास्ते में ही उन्हें अपने पिता के देंहात की दुखद खबर मिली।
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18वें एशियाई खेल में गोल्ड जीतने वाले शॉट पुटर तेजिंदर पाल सिंह को मालूम था कि उनके पिता की हालत गंभीर है। इसलिए तेजिंदर ने दिल्ली उतरते ही सड़क के रास्ते अपने गांव मोगा जाने का निर्णय किया। मगर वह अपने गृहनगर से कुछ ही दूर थे कि उन्हें यह दर्दनाक खबर मिली। शॉट पुटर तेजिंदर पाल सिंह अपने पिता की आखिरी ख्वाहिश पूरी नहीं कर सके। उनके पिता अपने बेटे द्वारा देश के लिए जीते गोल्ड मेडल को अपने हाथ में उठाना चाहते थे।
मोगा (पंजाब) के 23 वर्षीय एथलीट तेजिंदर पाल सिंह ने 18वें एशियाई खेल में पांचवें प्रयास में 20.75 मीटर दूर गोला फेंककर एशियाई खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया और देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। मोगा के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले तेजिंदर पाल सिंह तूर बचपन में एक क्रिकेटर बनना चाहता था।
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लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अपने पिता के कहने पर उन्होंने शॉटपुट खेलना शुरू किया और ये उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ। पंजाब के मोगा जिले के इस शॉट पुटर खिलाड़ी ने कई अहम मुकाबलों में भारत को पदक दिलाने में कामयाबी हासिल की है।