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जैवलिन में लीन योद्धा नीरज चोपड़ा की गाथा

नई दिल्ली
कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के स्वर्ण पदकधारी नीरज चोपड़ा जब एनबीटी के विशेष अतिथि के रूप में हमसे रू-ब-रू हुए तो 20 साल के इस जैवलिन चैंपियन से विस्तार से बातचीत हुई।

नीरज ने यह भी बताया कि जब उन्होंने शुरुआत की तो 700 ग्राम वजन का जैवलिन था और उनका थ्रो 35-40 मीटर तक जाता था, इसके 10-15 दिन बाद ही जिले में एक कॉम्पिटिशन था, जिसमें नीरज ने 45 मीटर भाला फेंका। इसके बाद स्टेट और नैशनल लेवल पर कई और प्रतिस्पर्धाओं में शिरकत करते हुए खुद को मांजते चले गए। पहले एक-डेढ़ साल कोई पोजिशन नहीं आती थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और फोकस बरकरार रखा।

नीरज की कामयाबी के सफर का पहला बड़ा मोड़ साल-2012 में हुए जूनियर नैशनल कॉम्पिटिशन में आया, जब उन्होंने अंडर-16 में खेलते हुए करीब 64 मीटर दूरी के पिछले रेकॉर्ड को ध्वस्त किया और इसे 68 मीटर तक पहुंचा दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हाल ही में जकार्ता एशियाड में 88.06 मीटर की दूरी के साथ गोल्ड जीतने वाले इस ऐथलीट ने बताया कि हर बार खुद को और सुधार कर वह अपने लिए नए टारगेट सेट करते हैं, जिसमें ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए तकनीकी सुधार और बाजुओं की ताकत बढ़ाने पर फोकस होता है।

अगर मैं जैवलिन थ्रोअर नहीं होता तो पता नहीं कि मैं क्या कर रहा होता, क्योंकि मैं पढ़ाई में भी इतना अच्छा नहीं था। मुझे लगता है कि मैंने जैवलिन को अपनाकर अपनी जिंदगी का सबसे बढ़िया फैसला लिया है।

एशियाड में भारत के ध्वजवाहक रहे और देश के लिए कई सोने का तमगा जीतने के बावजूद नीरज चोपड़ा अब भी 'किसान के बेटे' हैं। नीरज ने कहा, 'बाहर की दुनिया के लिए भले ही मैं एक स्पोर्ट्स स्टार हूं, लेकिन परिवार के लिए अब भी वैसा ही हूं। गलतियों पर मुझे अब भी डांट पड़ती है।' उनके चाचा भीम चोपड़ा ने बताया कि वह विदेशों से मेडल जीतकर आने के बावजूद पानीपत में अपने पैतृक घर पर खेती में अब भी हाथ बंटाने जाते हैं और यह चीज उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। उनका कहना था कि हम कहीं भी पहुंच जाएं हमारा जमीन से जुड़ा रहना जरूरी है। नीरज की बड़ी जॉइंट फैमिली है। एशियाड में मेडल जीत की खुशी में नीरज के घर पर 23 सितंबर को एक बड़ा कार्यक्रम भी रखा गया है जिसमें आसपास के गांवों से कई हजार लोग शामिल होने जा रहे हैं।

अपने खूबसूरत सजीले गठन के अलावा नीरज के लंबे बाल भी चर्चा में रहते हैं, जब उनसे पूछा गया कि क्या वे इस मामले में किसी खिलाड़ी से प्रभावित हैं तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, मैं बचपन से ही लंबे बालों का शौकीन रहा हूं। हालांकि कभी-कभी मुझे अपने खेल के दौरान इससे थोड़ी परेशानी आती है।

नीरज चोपड़ा से जब पूछा गया कि जैवलिन के अलावा अन्य खेल के किस खिलाड़ी से प्रभावित हैं तो उनका कहना था कि कई ऐथलीट्स ने व्यक्तिगत इवेंट्स में बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया है, लेकिन वह रेसलर सुशील कुमार के प्रशंसक हैं। वह सुशील की उपलब्धियों को बड़ा मानते हैं क्योंकि ओलिंपिक्स में दो बार मेडल हासिल करना आसान नहीं है। नीरज ने कहा कि ऐथलीट्स का हमारा मौजूदा बैच काफी अच्छा है जिनसे तोक्यो ओलिंपिक्स में मेडल की तादाद बढ़ने की उम्मीद है।

नीरज अब अपने सबसे बड़े लक्ष्य यानी ओलिंपिक्स मेडल की ओर बढ़ रहे हैं। उनका कहना था कि किसी ऐथलीट के लिए ओलिंपिक्स गोल्ड मेडल से बड़ा सपना कुछ नहीं हो सकता। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि वे जैवलिन में ओलिंपिक्स रेकॉर्ड (98.48 मीटर) को भी पार कर सकते हैं तो नीरज ने विश्वास जताते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन तो लगातार अच्छा चल ही रहा है और अभी उनके पास तोक्यो ओलिंपिक्स (2020) के लिए वक्त भी है तो मुझे लगता है कि नतीजा बढ़िया आएगा।

उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि एक ऐथलीट के लिए वह दिन भी अच्छा होना चाहिए। नीरज के मुताबिक, ' लंदन ओलिंपिक्स में भी हम देखें तो 84 मीटर की दूरी पर ही गोल्ड मेडल मिल गया था। वहां कई थ्रोअर ऐसे थे जो 90 मीटर से ज्यादा की दूरी तय कर चुके थे, लेकिन उस दिन उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। इसलिए यह किस्मत की भी बात है कि किस दिन किसकी गोटी चल जाए।'