स्पोर्ट्स डेस्क। कहते है अगर जीवन में कुछ करने की ठान रखी हो तो कोई आपको सफलता पाने से नहीं रोक सकता। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है खो-खो खिलाड़ी जूही झा ने। जूही झा अपने सपने को साकार करने लिए सुलभ शौचालय में रही, जहां आप सोच सकते है कितनी दुर्गंध आती है। मध्य प्रदेश में इंदौर के एक सुलभ शौचालय में 12 साल रहकर खो-खो खिलाड़ी जूही झा ने सरकार द्वारा खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित विक्रम पुरस्कार हासिल किया।
आपको जानकर हैरानी होगी इस वर्ष यह सम्मान पाने वाली जूही शहर की एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं। जूही ने बताया, 'हम करीब 12 साल सुलभ शौचालय में रहे। पिता को 6-7 हजार की कमाई होती थी जिससे घर चलता था। वो बहुत बुरा समय था, लेकिन मैंने खेलना नहीं छोड़ा। फिर तीन साल पहले पिता की यह नौकरी भी चली गई और घर चलना मुश्किल हो गया।
आगे जूही ने बताया, मां रानी सिलाई करती हैं और मेरी एक स्कूल में नौकरी लगने से कुछ मदद हो जाती है । खुशी है कि अब मेरी सरकारी नौकरी लगने से परिवार को मदद मिलेगी। अब उनका परिवार एक किराए के मकान में रहता है । जूही सरकारी नौकरी हासिल कर अपने परिवार का साथ देना चाहती हैं और अपने सपनो को साकार करना चाहती है । '
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