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सचिन की वजह से इन 5 खिलाड़ियों को नही मिली भारतीय टीम में जगह, नहीं तो आज होते बड़े नाम

सचिन तेंदुलकर को हमेशा से ही क्रिकेट का भगवान माना जाता है. उन्होंने लगभग दो से ज्यादा दशक तक टीम इंडिया के साथ रहें है. इसके अलावा वो इस दौरान टीम इंडिया की बैकबोन की तरह सामने आए है. पर आप को जानकार हैरानी होगी, उनकी इस कामयाबी की वजह से कुछ खिलाड़ियों को मौका नही मिला. तो आइये जानते है, उन पांच के बारें में:

अमोल मजूमदार 

भारत की सबसे प्रतिष्ठित घरेलू ट्रॉफी रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन सचिन या द्रविड़ के नहीं बल्कि अमोल मजूमदार के नाम दर्ज हैं. अपने करियर में उन्होंने 171 प्रथम श्रेणी मैच खेले जिस दौरान उन्होंने 48.13 की औसत से 11,167 रन बनाए. इसमे 30 शतक और 60 अर्धशतक शामिल रहे और उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी 260
की रही. इसके अलावा लिस्ट-ए क्रिकेट के 113 मैचों में अमोल ने 3286 रन बनाये.

सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जब मुंबई के शारदा आश्रम स्कूल की तरफ से क्रिकेट खेलते हुए दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहे थे तब उन दोनों का एक दोस्त भी था, जो उस टीम की जान था. वो क्रिकेटर अमोल ही थे. ये तीनों महारथी साथ ही बड़े हुए, एक ही कोच (रमाकांत आचरेकर) से ट्रेनिंग ली और जब सचिन-कांबली ने स्कूल क्रिकेट में 664 रनों की साझेदारी का रिकॉर्ड बनाया था तब बेंच पर अमोल ही वो खिलाड़ी थे, जिनको अगले नंबर पर बल्लेबाजी करने आना था, लेकिन ना कभी उस पारी के दौरान उन्हें खेलने का मौका मिला और ना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में.

ऋषिकेश कानितकर 

 

इसी कड़ी में एक और नाम है ऋषिकेश कानितकर का.  रणजी क्रिकेट में आठ हजार रन पूरे करने वाले कुल तीन क्रिकेटरों में से एक कानितकर के नाम 28 शतक दर्ज हैं.

एलीट और प्लेट लीग खिताब अपने नाम करने वाले वह एकमात्र कप्तान हैं. वह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान की ओर से खेल चुके हैं. उनको भी सचिन की वजह से टीम में मौका नही मिला.

मिथुन मन्हास 

दिल्ली के इस बल्लेबाज़ को भी सचिन की वजह से कभी भी टीम इंडिया में मौका नही मिला. मिथुन ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में 157 मैचों की 244 पारियों में 9714 रन बनाए है. इस दौरान उन्होंने 27 शतक और 49 अर्धशतक भी लगाए है.

इसके अलावा लिस्ट ए के करियर में उन्होंने 130 मैचों की 122 पारियों में 4126 रन बनाए है. इस दौरान उन्होंने 5 शतक और 26 अर्धशतक बनाए है. इस दौरान दोनों में उनका औसत से 45 के ऊपर था. क्रिकेट से दूर होने से बाद अब दिल्ली की टीम से जुड़ गए है.

देवेन्द्र बुंदेला

देवेन्द्र बुंदेला के नाम रणजी में सबसे ज्यादा बार हिस्सा लेने का रिकॉर्ड है. इसके अलावा उन्होंने 138 रणजी मैचों में हिस्सा लिया है. वो लगातार 1995 से खेल रहे है. उनके नाम रणजी क्रिकेट में 9654 से ज्यादा रन है.
इसके अलावा वो लगातार मध्यमक्रम में खुद को साबित कर रहें है. लेकिन टेस्ट क्रिकेट में सचिन की मौजूदी और वन डे क्रिकेट में राहुल द्रविड़ जैसे बल्लेबाजों की वजह से वो कभी भी टीम में जगह नही बना सके.
रश्मि रंजन परिदा 
रश्मि भी माध्यमक्रम में बल्लेबाज़ के रूप में जाने जाता थे. उनकी वजह से राजस्थान ने रणजी का अपना पहला खिताब जीता था. रणजी में उन्होंने 8317 रन बनाए है. इसके अलावा उन्हें इंडिया ए टीम में भी जगह मिलती थी, लेकिन वो भी टीम इंडिया में अपनी जगह नही बना सके.
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