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बेगूसराय में बीजेपी को जीत दिलाने वाले पहले नेता थे भोला सिंह, ऐसे याद कर रहे हैं उनके साथी

बेगूसराय (सुधांशु पाठक) : सांसद भोला सिंह अब नहीं रहे.  शब्द और साहित्य के साक्षात प्रतिमूर्ति थे भोला बाबू. पक्ष और विपक्ष को स्वीकार्य थे तो थे ही. बेबाक, आत्मविश्वास से हमेशा लबरेज. भाषण के मास्टर थे भोला बाबू. राजनीति में भले ही वे अलग अलग दलों से ताल्लुक रखे पर उनका अपना वोटर था. जो उनके सहनशीलता,  वाकपटुता और उनके व्यवहार का परिचायक है.

बेगूसराय में बीजेपी को जीत दिलाने वाले पहले नेता थे भोला सिंह

 1998 में बीजेपी ज्वाइन करने के बाद वर्ष 2000 में भोला बाबू को बेगूसराय विधानसभा का टिकट मिला. चुनाव लड़े और जीत गए.  इस प्रकार बेगूसराय में पहली बार बीजेपी को जीत दिलवाने में भोला सिंह पहले नेता बन गए. वहीं लोकसभा चुनाव में भी बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े फिर जीत गए. इस तरह बेगूसराय में पहली बार बीजेपी को लोकसभा पहुंचाने वाले नेता में भोला सिंह का नाम जुट गया.

उनके निधन पर साहेबपुर कमाल के विधायक और राजनीतिक जीवन मे उनके साथी रहे नारायण यादव ने कहा कि भोला बाबू का जाना जिला ही नहीं राज्य के लिए अपूर्णीय क्षति है.  बीजेपी के राष्ट्रीय मंत्री सह MLC  रजनीश सिंह ने कहा कि भोला सिंह जिला के अविभावक थे. उनकी कमी हमेशा खलेगी. बीजेपी जिलाध्यक्ष संजय सिंह,  मेयर उपेंद्र सिंह,  बखरी विधायक उपेंद्र पासवान,  पूर्व सांसद मोनाजिर हसन,  पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रतन सिंह, राजद नेता सतानंद संबुद्ध उर्फ ललन यादव,  कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह,  विधायक अमिता भूषण, मृत्युंजय वीरेश, कृष्णमोहन पप्पू,  समेत सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता व बुद्धिजीवियों ने उनके प्रति शोक संवेदना प्रकट की.

निधन के बाद शोक की लहर

भोला सिंह के निधन के बाद शोक की लहर दौड़ गई. सभी स्तब्ध हैं आज उनके समर्थक भोला बाबू के कार्य, स्वभाव और सहनशीलता की बातें बता रहे हैं . बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष संजय सिंह ने बताया कि वे हमेशा कहते थे ‘राजनीति में कभी गांठ मत बांधो, राजनीति भूलने की चीज है. बताते है कि भोला सिंह हमेशा गरीबों की बात करते थे.

समाज के दबे कुचले लोगों की आवाज की खातिर धरना प्रदर्शन के माध्यम से न्याय दिलाने का प्रयास करते थे. उनमें एक खास बात थी कि वे कभी किसी को अपना विरोधी नहीं समझा. चाहे वह किसी दल या संगठन से जुड़े हों सबों के साथ उनका सौम्य स्वभाव उनके सभ्य संसदीय जीवन का एक उदाहरण ही साबित होगा जिसकी पूर्ति शायद संभव न हो.

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