टीम इंडिया ने 2019 के वर्ल्ड कप के लिए खुद को तैयार करना शुरू कर दिया है. टीम लगातार प्रयोग कर रही है. टीम इंडिया ने अभी तक कई खिलाड़ियों को उसी सिलसले में मौका भी दिया है. लेकिन हर बार की तरह महेंद्र सिंह धोनी टीम की बल्लेबाज़ी में कमजोर कड़ी में रूप में सामने आ रहें है.
ऐसे में आज हम आप को बताएँगे कि किस वजह से धोनी को टीम में शामिल करना ठीक उसी तरह की गलती है जैसे 2014 के टी-20 वर्ल्ड कप में युवराज सिंह को शामिल करना था.
युवराज सिंह का वो निराशाजनक प्रदर्शन

कैंसर को मात देने के बाद टीम इंडिया का सबसे बड़ा मैच विनर एक बार फिर से क्रिकेट के मैदान में वापस आ गया था. टीम को उनसे काफी ज्यादा उम्मीदें भी थी, लेकिन टी-20 वर्ल्ड कप 2014 के फाइनल में देश का ये हीरो एक विलेन बन गया.
युवराज ने फाइनल में 21 गेंदों में 11 रन की पारी खेली. उनकी इस पारी की वजह से भारत सिर्फ 130 रन ही बना सका और भारत को हार का सामना करना पड़ा.
धोनी भी चल रहे है वही राह

अगर धोनी की बात करें तो धोनी भी इस समय कुछ उसी राह पर है. धोनी इस समय टीम मैच फिनिशर की भूमिका में नज़र आते है. इसके अलावा वो टीम को स्कोर के पास ले जाते है.
धोनी ने अपने पूरे करियर में अभी तक यही किया है. लेकिन धोनी का हालिया प्रदर्शन उनकी काबिलियत पर सवाल उठाता है, इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में जैसे दर्शकों ने धोनी को लेकर हूटिंग की थी, उससे साफ था कि वो धोनी को अब टीम में चाहते नही है.
वहीं धोनी खुद को अब स्ट्राइक रोटेट करने में सफल नही होते है और खुद वो भी अब बिग हिट करने में संघर्ष कर रहें है. ऐसे में उनका वर्ल्ड कप में शामिल होना काफी खतरनाक फैसला है.
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