6 अक्टूबर का दिन विजय हजारे ट्रॉफी और भारतीय घरेलू क्रिकेट के लिए यादगार दिन हो गया। उत्तराखंड के सलामी बल्लेबाज करनवीर कौशल ने सिक्किम के खिलाफ 202 रनों की पारी खेली।
भारत की घरेलू लिस्ट ए टूर्नामेंट का पहला दोहरा शतक है। इससे पहले अजिंक्य रहाणे ने 2008 में मुंबई की तरफ से खेलते हुए महाराष्ट्र के खिलाफ 187 रन बनाये थे।
करनवीर का पहला प्यार नहीं था क्रिकेट

अपने 7वें ही लिस्ट ए मैच में दोहरा शतक बनाने वाले करनवीर ने पहली बार 16 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। वह पहले टेबल टेनिस खिलाड़ी थे। करनवीर की पारी से उनके माता पिता भी काफी खुश हैं। करनवीर के माता और पिता दोनों ही पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं।
देहरादून के रहने वाले पिता निर्मल कुमार शर्मा और माँ राधा कौशल का मानना है कि उनके बेटे ने जो भी हासिल किया है वह देवभूमि के आशीर्वाद की वजह से है।
कानपुर में सीखा क्रिकेट
करनवीर ने क्रिकेट के शुरुआती गुर देहरादून में ही सीखा लेकिन टीम को मान्यता नहीं होने की वजह है से वह उत्तर प्रदेश चले गए। वहां कानपुर में उन्होंने कोच मनीष पांडे से कोचिंग ली। पिछले दो सालों से वह उत्तर प्रदेश के लिए रणजी कैंप में हिस्सा ले रहे थे। इस साल बीसीसीआई से उत्तराखंड को मान्यता मिलने के बाद वह कानपुर से वापस आ गए।
विजय हजारे ट्रॉफी में जमकर बोला रहा बल्ला

विजय हजारे ट्रॉफी में उत्तराखंड के इस बल्लेबाज का बल्ला जमकर बोल रहा है। अभी तक खेले गए 7 मैचों में करनवीर कौशल ने 467 रन बनाये हैं। वह सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों ने चौथे क्रम पर हैं और उन्हें ग्रुप का एक मैच खेलना बाकि है।
7 मैचों में उन्होंने 3 बार शतकीय पारी खेली है। इसमें सिक्किम के खिलाफ खेली गई 202 रनों के पारी के अलावा मिजोरम के खिलाफ 118 और पुडुचेरी के खिलाफ खेली गई 101 रनों की पारी भी शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने यह रन 122 की स्ट्राइक रेट से बनाये हैं।
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