न केवल क्रिकेट के खेल में बल्कि दुनिया के हर खेल में कोच की टीम के जीतने और हारने में उतनी ही भूमिका होती है, जितनी कि मैदान पर खेल रहे किसी खिलाड़ी की। क्रिकेट का इतिहास कुछ ऐसा रहा है कि कोच की रणनीतियों ने टीम को बेहद की करीबी मुकाबलों में जीत दिलाई।
मुझे आज भी याद है वह पल जब 2011 विश्व कप फाइनल में महेंद्र सिंह धोनी के उस छक्के को देख, गैरी कर्स्टन किस तरह झूम उठे थे। इस आर्टिकल में हम प्रकाश डालने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही कोचिंग करियर पर जो सदियों तक फैन्स को याद रहेंगे।
जॉन बुकानन

जॉन बुकानन ने अपना अंतरराष्ट्रीय कोचिंग करियर ऑस्ट्रेलिया के साथ 1999 में की। उनके कोच बनने के बाद जैसे कई वर्षों तक ऑस्ट्रेलिया ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। टीम ने जीत की राह ऐसी पकड़ी की एक समय उनका जीत का रिकॉर्ड पन्द्रह मैचों में पंद्रह जीत पहुँच गया था।
उनके नाम ऑस्ट्रेलिया के साथ दो विश्व कप के साथ 2006 में जीती चैंपियंस ट्रॉफी भी शामिल है।
डेव वॉटमोर

डेव वॉटमोर, अपने छोटे से क्रिकेट करियर में तो ज्यादा कुछ कर नहीं पाए। लेकिन उनका कोचिंग करियर, बहुत से रिकॉर्ड उनके नाम कर गया। फ़िलहाल वो दक्षिण भारत के राज्य, केरल क्रिकेट टीम के मुख्य कोच हैं।
उन्होंने श्रीलंका को 1996 विश्व कप जिताने के साथ-साथ 2012 में पाकिस्तान को एशिया कप भी जिताया। एशिया कप के इतिहास में खेले गए उस फाइनल मुक़ाबले को आज भी सबसे रोमांचक मुकाबलों में शामिल किया जाता है।
बॉब वूल्मर

अपने दौर के सबसे महान ऑल-राउंडरों में से एक रहे बॉब वूल्मर ने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत साउथ-अफ्रीका के साथ जुड़कर की। यह वह दौर रहा, जब साउथ-अफ्रीकी क्रिकेट में गज़ब का सुधार हुआ। एकदिवसीय क्रिकेट की टॉप-टीमों में शुमार हो चुकी थी अफ़्रीकी टीम।
इसके बावजूद साउथ-अफ्रीका, 1996 विश्व कप के क्वार्टर-फाइनल में और 1999 के सेमी-फाइनल मुक़ाबले में हारकर बाहर हो गयी थी। इसके बाद 2004 में उन्हें भारत के पडोसी देश, पाकिस्तान के कोच की भूमिका सौंपी गयी। हालाँकि बड़े ही रहस्यमयी तरीके से 2007 में उनकी मौत हो गयी।
डंकन फ्लेचर

अपने फर्स्ट-क्लास करियर में 4000 से अधिक रन और 200 से अधिक विकेट चटकाने वाले ज़िम्बाब्वे में जन्मे डंकन फ्लेचर। उनके कार्यकाल के दौरान इंग्लैंड क्रिकेट, एक बार फिर ऊपर उठने में सफ़ल हुआ।
उन्होंने 2011 विश्व कप के बाद भारतीय टीम को भी अपनी सेवाएं दी। उन्होंने भारत को 2013 चैंपियंस ट्रॉफी भी जिताई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कोई नया कॉन्ट्रैक्ट ऑफर नहीं किया गया। उनके कोचिंग रिकॉर्ड में भारतीय क्रिकेट टीम की लगातार आठ सीरीज़ जीत भी शामिल हैं।
गैरी कर्स्टन

गैरी कर्स्टन ने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत भारत से की। एक कोच के तौर पर ही नहीं, उन्होंने एक खिलाड़ी के तौर पर भी अपने नाम कई रिकॉर्ड किये हैं। उन्होंने भारत को 2008 एशिया कप के फाइनल में पहुँचाने में बहुत मदद की। हालाँकि भारत फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ़ 100 रनों से हार गयी थी।
उन्होंने भारत को 2011 विश्व कप जिताने के साथ-साथ न्यूज़ीलैंड को न्यूज़ीलैंड में हराने में भी मदद की। लेकिन इसके बाद उन्हें साउथ-अफ़्रीकी टीम का कोच नियुक्त किया गया। फ़िलहाल वो ऑस्ट्रेलियाई डोमेस्टिक लीग में होबार्ट हरिकेन्स और आई.पी.एल में रॉयल चैलेन्जर्स को अपनी कोचिंग की सेवाएं दे रहे हैं।
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