भारतीय टीम को पृथ्वी शॉ के रूप में एक नया हीरा मिल गया हैं. उन्होंने पहले ही दिन न सिर्फ अपनी शानदार बल्लेबाजी से अपने फैंस का दिल जीता. बल्कि एक शतक भी जड़ दिया. मात्र 18 साल के पृथ्वी शॉ में ऐसी कोई तो बात हैं, जो उन्हें बाकि क्रिकेटर्स से बिल्कुल अलग बना देती हैं.
किसने की पृथ्वी की प्रतिभा की पहचान?

महज 18 साल का लड़का क्रिकेट की दुनिया में इतना धमाल मचा सकता हैं. ये बात किसी ने भी नहीं सोची होगी और न ही किसी के भी जेहन में आयी होगी. इस लड़के की प्रतिभा को कोयले में से निकालकर हीरे की तरह परखा मिलिंद ने. जी हाँ, मात्र 7 साल की उम्र में ही इन्होने पृथ्वी की इस प्रतिभा को पहचान लिया था.
मिलिंद ने ही पृथ्वी को रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करने का मौका दिलवाया था. तभी आज भारतीय टीम को उनका नायब सितारा मिल पाया हैं. बता दे ये वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर की भी परख की थी.
इन्होने सचिन को भी 1988 में रणजी टीम में पहुंचवाया था. तब सचिन की उम्र महज 15 साल ही थी जब सचिन ने ये सीढ़ी चढ़ी थी. ये उस समय चयन समिति का हिस्सा थे.
मुंबई सलेक्शन समिति के चेयरमैन हैं मिलिंद रेगे

सचिन को टीम इंडिया में पहुंचाने के बाद मुंबई चयन समिति के चेयरमैन मिलिंद रेगे ने 17 साल की उम्र में ही पृथ्वी की काबिलियत को पहचान लिया था और उनकी प्रतिभा को देख ही उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को रणजी की कैप दिलवाई और दोनों ही बेहतरीन बल्लेबाजों
ने शतक लगा कर उनका नाम रोशन किया.
मिरर से की खास बातचीत

मिलिंद ने मुंबई मिरर से की खास बातचीत के दौरान कहा कि
“पृथ्वी के बारे में मुझे सबसे अच्छी चीज़ पसंद ये हैं कि वह एक गेंद के अच्छे स्ट्राइकर हैं जिस तरह सचिन हैं वो बिलकुल उन्ही के जैसे हैं उनके अंदर रनों को लेकर एक जबरदस्त भूख हैं और मुंबई हमेशा से ही ऐसे खिलाड़ियों को मौका देता आया हैं.”
उन्होंने आगे बातचीत के दौरान ये भी कहा कि
“मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं कहूंगा कि पृथ्वी मेरी वजह से यहाँ तक पहुंचा वो बहुत टैलेंटेड हैं, जिसकी वजह से हमारी टीम ने उनका चयन किया. मैंने मैच की सुबह ही कोच चंद्रकांत पंडित से उन्हें खिलाने को कहा था.”
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