स्पोर्ट्स डेस्क। मुरली विजय और करुण नायर, जिन्हें हाल ही में भारतीय टेस्ट टीम से बाहर कर दिया गया है, चयन समिति के संबंध में की गई टिप्पणी के कारण परेशानी में पड़ सकते है। हालाँकि दोनों खिलाड़ी वर्तमान में टेस्ट टीम से बाहर हैं, लेकिन फिर भी दोनों बोर्ड के केंद्रीय अनुबंध में शामिल है और बीसीसीआई के अनुसार उन्होंने चयन समिति के खिलाफ बोलकर नियमों का उल्लंघन किया है।
सबसे पहले करुण नायर ने चयनकर्ताओं और खिलाड़ियों के बीच बातचीत की कमी का मामला उठाया था। टीम में रिजर्व बल्लेबाज की जरूरत होने पर भी 3 महीने तक बेंच पर आराम करवाने के बाद नायर को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद एक इंटरव्यू के दौरान नायर ने कहा था कि चयनकर्ताओं या टीम प्रबंधन की तरफ से उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें टीम से बाहर क्यों किया गया है।
इसके बाद चयन समिति के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद खुद का बचाव किया और कहा कि इस बारे में नायर से बात की गई थी और समिति खिलाड़ियों के साथ बातचीत करती रहती है।
इसके बाद मुरली विजय ने भी इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में बाहर होने के कारण नहीं बताने की बात कही थी लेकिन चयनकर्ताओं ने कहा कि बीसीसीआई ने उनके लिए काउंटी खेलने की व्यवस्था की है। इसके बाद हरभजन सहित कई सीनियर खिलाड़ी इनके बचाव में सामने आये थे और यह कहा कि अलग अलग खिलाडियों के लिए चयन समिति के नियम अलग अलग है।
हालाँकि बीसीसीआई और सीओए ने चयनकर्ताओं का बचाव किया है। बोर्ड के अधिकारीयों के अनुसार खिलाड़ियों की चयन नीति पर बोलकर विजय और करुण ने सही काम नहीं किया है। यह केंद्रीय अनुबंध का उल्लंघन है। केंद्रीय अनुबंध के अनुसार, कोई भी खिलाड़ी हाल ही में सम्पन्न हुए दौरे के बारे में 30 दिनों तक बात नहीं कर सकता है। चयनकर्ताओं की तरफ से बातचीत में कोई कमी नहीं हुई है और अगर विजय और करुण की बात है तोउनके खिलाफ क्या कदम उठाना है, इसका निर्णय चयन समिति ही करेगी।
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