Halo !!! Saya Kang Ismet, ini adalah blog tentang AMP HTML dan cara penerapannya

Ind vs WI: वनडे सीरीज में भारत को सुलझानी होगी मध्यक्रम की पहेली

मुंबई
भारतीय क्रिकेट टीम और चयनकर्ताओं पर ठहरी नजरों के बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासक समिति (सीओए) ने बुधवार को हैदराबाद में एक बैठक बुलाई है। यह बैठक, वेस्ट इंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया के चयन से एक दिन पहले बुलाई है।

हालांकि, इस मीटिंग के अतिरिक्त गुरुवार को चयनकर्ताओं की बैठक काफी मायने रखती है जिसमें चयनकर्ता वेस्ट इंडीज के खिलाफ 21 अक्टूबर से होने वाली पांच वनडे मैचों की सीरीज के लिए टीम का चयन करेंगे। चयनकर्ता के सामने नंबर 4, 5, और 6 पोजिशन की पहेली का हल तलाशने का खास प्रेशर होगा। बीते करीब 15 महीनों में इन पोजिशन पर अलग-अलग बल्लेबाजों को आजमाया गया है। और अब ऐसा वक्त आ गया है कि यहां पर स्थिरता की जरूरत है।

2017 में खेली गई आईसीसी चैंपियंस ट्रोफी से लेकर अब तक भारत ने नंबर 4, 5 और 6 पर 10 अलग-अलग क्रिकेटर्स को मौका दिया है। इसमें 2019 वर्ल्ड कप के लिए तय माने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी हों या फिर युवराज सिंह, जिनके लिए वापसी की राह अब बहुत मुश्किल नजर आती है। इसके अलावा अजिंक्य रहाणे, केएल राहुल, दिनेश कार्तिक, सुरेश रैना, मनीष पांडे, केदार जाधव, हार्दिक पंड्या और श्रेयस अय्यर को आजमाया गया है। भारत ने जून 2017 से लेकर सितंबर 2018 के बीच कुल 36 एकदिवसीय मैच खेले हैं।

विश्व कप से पहले भारत को कुल 18 वनडे मैच और खेलने हैं। 2019 का विश्व कप 30 मई से इंग्लैंड में खेला जाएगा। इन 8 महीनों में भारतीय टीम प्रबंधन को इन पोजीशंस के बारे में गंभीरता से विचार करना होगा। यह बात साफ है कि बीते 30 से ज्यादा वनडे मैचों में भारतीय टीम अपने बल्लेबाजी क्रम को तय नहीं कर पाई है। अब जब विश्व कप में ज्यादा वक्त नहीं बचा है ऐसे में प्रबंधन को जल्द ही इन पोजिशंस पर कोई फैसला करना होगा।

केएल राहुल के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। उनके पास बल्लेबाजी की क्षमता है। लेकिन रोहित शर्मा और शिखर धवन की मजबूत सलामी जोड़ी के चलते उन्हें वनडे टीम से बाहर बैठना पड़ता है। नंबर चार और पांच पर भी उन्हें सिर्फ पांच मैचों में मौका दिया गया। और इनमें भी उनकी पोजीशन तय नहीं रही। टीम प्रबंधन को जरूरत है कि 50 ओवर के फॉर्मेट में राहुल की भूमिका उन्हें स्पष्ट की जाए।

चूंकि रोहित और धवन की सलामी जोड़ी लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में राहुल को नंबर 4 पर बल्लेबाजी करवाने पर चयनकर्ताओं को फैसला लेना होगा- प्रबंधन को सोचना होगा कि क्या वह मध्यक्रम में बल्लेबाजी करेंगे या टीम में उनकी भूमिका तीसरे सलामी बल्लेबाज की है। यह बात भी सच है कि कर्नाटक के इस सलामी बल्लेबाज के आंकड़े भी उनके पक्ष में नहीं जाते।

अब दो अन्य बल्लेबाजों, जिनके नाम पर विचार किया जाना चाहिए वे हैं, पृथ्वी शॉ और ऋषभ पंत। शॉ ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपने करियर के पहले ही टेस्ट में सेंचुरी लगाई वहीं पंत ने भी इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज में सैकड़ा जड़ा था। अगर पंत के नाम पर विचार किया जाता है तो फिर सिलेक्टर्स पर तीन विकेटकीपर चुनने की दुविधा हो सकती है।

भारतीय टीम प्रबंधन बाएं और दाएं हाथ के बल्लेबाजों का यही मिश्रण रखना चाहता है। वर्ल्ड कप में जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है उन पर नजर डालें तो टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाज पूर्व में भी काफी कारगर रहे हैं।

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान कहा था कि अधिकता की समस्या बुरी बात नहीं है लेकिन सही मायनों में देखा जाए तो भारतीय टीम को अभी तक बल्लेबाजी समस्या का हल नहीं मिला है।