भारतीय क्रिकेट का इतिहास बड़ा ही जबरदस्त रहा है। लेकिन इन सबके बीच भारतीय क्रिकेट में अभी तक पेशेवर ऑलराउंडर खिलाड़ी गिने-चुने ही हुए हैं। वैसे तो पूर्व महान खिलाड़ी कपिल देव जैसा ऑलराउंडर तो कोई नहीं रहा, लेकिन कुछ खिलाड़ी आए जिन्होंने अपने हरफनमौला खेल से उम्मीद जरूर जगायी।
रविन्द्र जडेजा के प्रदर्शन में एक बार फिर दिखा निखार
वर्तमान में स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को देखा गया है जिनमें बल्लेबाजी और गेंदबाजी काबिलियत जरूर है पर सवाल है कि क्या हार्दिक पंड्या के प्रदर्शन में तीनों ही फॉर्मेट में प्रभाव नहीं देखने को मिला है।

तो वहीं हार्दिक पंड्या को स्पिन गेंदबाज और बल्लेबाजी की दम दिखाने वाले रविन्द्र जडेजा से एक जबरदस्त प्रतिस्पर्धा मिल रही है। रविन्द्र जडेजा का भारत भूमि पर तो तीनों ही फॉर्मेट में खूब कमाल दिखा है। तो साथ ही हाल के दिनों में विदेशी जमीं पर भी प्रदर्शन में सुधार हुआ है।
2008 विश्व कप और आईपीएल से बनायी अपनी पहचान
रविन्द्र जडेजा…. साल 2008 के अंडर-19 विश्व कप से अपनी पहचान बनाने वाले इस ऑलराउंडर खिलाड़ी को तीनों ही फॉर्मेट का प्रभावशाली ऑलराउंडर माना जाए या नहीं है सबसे बड़ा सवाल है जो हर किसी के जेहन में है।

रविन्द्र जडेजा की कहानी बड़ी दिलचस्प है। साल 2008 के आईपीएल में छाने के बाद पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी शेन वार्न ने इन्हें ‘रॉकस्टार’ मान लिया। इसके बाद 2009 में ही इस खिलाड़ी को भारतीय टीम में एन्ट्री मिल गई।
वनडे के बाद 2013 में टेस्ट सीरीज में मौका मिलने पर किया अपने आप को साबित
श्रीलंका के खिलाफ एक ऑलरउंडर के तौर पर अपने इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले रविन्द्र जडेजा का प्रदर्शन मिला-जुला रहा जिसके बाद उन्हें आलोचनाओं के बीच बाहर कर दिया गया। घरेलू क्रिकेट में दम दिखाने के बाद फिर से टीम में वापसी की।

इसके बाद महेन्द्र सिंह धोनी के जबरदस्त समर्थन के बीच 2012 में भारतीय टेस्ट टीम में जगह बना ली। इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में रविन्द्र जडेजा को मौका मिला, लेकिन इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई 4 मैचों की टेस्ट सीरीज करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
भारत के बने रेगुलर खिलाड़ी लेकिन विदेशी दौरे पर गिरता रहा प्रदर्शन
2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में रविन्द्र जडेजा ने प्रभावशाली गेंदबाजी करते हुए अपने नाम 24 विकेट दर्ज कर टीम के सबसे अहम खिलाड़ी बन गए। इसके बाद तो घरेलू सीरीज के लिए रविन्द्र जडेजा टीम के रेगुलर सदस्य बन बैठे।

लेकिन विदेशी दौरो पर कुछ ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा। बल्ले से कुछ अच्छी पारियां जरूर खेली लेकिन इसके अलावा प्रदर्शन में गिरावट देखी गई। फिर क्या था रविन्द्र जडेजा विदेशी दौरे पर बाहर रहने लगे और घरेलू दौरे के लिए ही जगह को पक्की रख सके।
चैंपियंस ट्रॉफी के बाद सीमित ओवर की क्रिकेट से हटे
अब धीरे-धीरे 2017 में हुई चैंपियंस ट्रॉफी के बाद जड्डू का सीमित ओवर की क्रिकेट से भी स्थान खतरें में पड़ गया और बाहर ही कर दिया गया।

लेकिन हाल ही में हुए इंग्लैंड दौरा जड्डू के लिए संजीवनी साबित हुआ और आखिरी टेस्ट में शानदार प्रदर्शन कर वनडे में वापसी की।
अब रविन्द्र जडेजा ने फिर साबित किया वो हैं तीनों ही फॉर्मेट के ऑलराउंडर!
इसके बाद तो जडेजा के सितारों ने एक बार फिर से करवट ली है और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। वो चाहे एशिया कप हो या वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज या वनडे सीरीज हो।

अब तो जड्डू ने एक बार फिर से 2019 विश्व कप के लिए अपना दावा ठोकने के साथ ही हार्दिक पंड्या के तीनों ही फॉर्मेट में ऑलराउंडर के स्थान को भी खतरा पैदा कर दिया है।
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