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Milkha Singh Birthday फ्लाइंग सिख जिसकी रफ्तार ने पार कर दी सरहद की दीवारें

 
नई दिल्ली 

एशियाई खेलों में 4 स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स में एक गोल्ड मेडल जीतनेवाले Milkha Singh की रफ्तार की दीवानी दुनिया थी। फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर इस धावक को दुनिया के हर कोने से प्यार और समर्थन मिला। मिल्खा का जन्म पाकिस्तान में हुआ, लेकिन वह आजादी के बाद हिंदुस्तान आ गए। मिल्खा की प्रतिभा और रफ्तार का यह जलवा था कि उन्हें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री फील्ड मार्शल अयूब खान ने दिया था।  
 

अयूब खान ने कहा, 'मिल्खा आज दौड़ नहीं उड़ रहे थे' 
Milkha Singh के जीवन पर बनी फिल्म में भी इस घटना को दिखाया गया है जब पाकिस्तान के स्टेडियम में मिल्खा-मिल्खा नाम गूंजने लगा था। लाहौर में उन्होंने पाकिस्तान के चोटी के धावक अब्दुल खालिक को हराया था। उन दिनों के तनावपूर्ण माहौल में भी स्टेडियम मिल्खा की जीत में झूमने लगा। दौड़ के बाद मिल्खा सिंह को पदक पहनाते हुए अयूब खान ने कंधा थपथपाकर मिल्खा को फ्लाइंग सिख कहा था। अयूब खान ने मिल्खा की तारीफ करते हुए कहा, 'आज मिल्खा सिंह दौड़ नहीं उड़ रहे थे इसलिए हम उन्हें फ्लाइंग सिख के खिताब का नजराना देते हैं।' 

रोम ओलिंपिक में काश मिल्खा ने पीछे मुड़कर न देखा होता! 
जब भी मिल्खा सिंह का जिक्र होता है रोम ओलिंपिक में उनके पदक से चूकने का जिक्र जरूर होता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'मेरी आदत थी कि मैं हर दौड़ में एक दफा पीछे मुड़कर देखता था। रोम ओलिंपिक में दौड़ बहुत नजदीकी थी और मैंने जबरदस्त ढंग से शुरुआत की। हालांकि, मैंने एक दफा पीछे मुड़कर देखा और शायद यहीं मैं चूक गया। इस दौड़ में कांस्य पदक विजेता का समय 45.5 था और मिल्खा ने 45.6 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी।' 

हवलदार के बेटे को लिया मिल्खा ने गोद 
मिल्खा सिंह की निजी जिंदगी भी बहुत प्रेरणा देनेवाली है। 3 बेटियों और एक बेटे के पिता मिल्खा ने 1999 में बैटल ऑफ टाइगर हिल में शहीद होनेवाले हवलदार विक्रम सिंह के बेटे को गोद लिया। मिल्खा ने उस बच्चे की पढ़ाई-लिखाई और परवरिश का पूरा खर्चा देने का ऐलान किया।