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जडेजा की ‘चोट’ पर विवाद: शास्त्री और BCCI के बयान में विरोधाभास, कौन सच्चा, कौन झूठा?

नई दिल्ली
पर्थ टेस्ट में रविंद्र जडेजा को चोट की वजह से नहीं खिलाए जाने वाले बयान पर कोच रवि शास्त्री फंसते दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ उन्होंने जहां ऑलराउंडर जडेजा को पर्थ टेस्ट के लिए अनफिट करार दिया तो दूसरी ओर बीसीसीआई ने बयान जारी करते हुए कहा कि रविंद्र जडेजा फिट हो गए थे तब उनका सिलेक्शन टीम में किया गया। यहां दोनों ही बयान एक-दूसरे के खिलाफ हैं। शास्त्री के बयान पर एक और सवाल उठता है कि अगर जडेजा अनफिट थे तो उन्हें पर्थ में खेले गए दूसरे टेस्ट की 13 सदस्यीय टीम में क्यों शामिल किया गया। रवि शास्त्री के अनफिट वाला बयान इसलिए भी संदेह में है, 

बीसीसीआई का बयान- चोट से उबर चुके थे जडेजा 
बीसीसीआई ने जोर देते हुए कहा है कि जब ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए जडेजा का टीम में चयन किया गया था, तो अपने कंधे की चोट से पूरी तरह उबर चुके थे और वह बुधवार से शुरू होने वाले बॉक्सिंग डे टेस्ट के लिए भी पूरी तरह फिट हैं। बीसीसीआई ने इस विज्ञप्ति में स्टेटमेंट दिया है, 'जडेजा के बाएं कंधे में लगातार सुधार हो रहा है और अब वह मेलबर्न में खेले जाने वाली सीरीज के तीसरे टेस्ट के लिए पूरी तरह फिट हैं।' 

64 ओवर की थी बोलिंग, तब हुआ था सिलेक्शन 
वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज के दौरान लगातार बोलिंग करने के कारण जडेजा ने अपने बाएं कंधे में असहजता की शिकायत की थी। इसके बाद उन्हें 2 नवंबर से मुंबई में एक्सपर्ट्स की देखरेख में इंजेक्शन दिए गए, जिससे जडेजा को आराम मिला और इसके बाद वह रणजी ट्रोफी में सौराष्ट्र के लिए 12 से 15 नवंबर के दौरान मैच खेले। इस मैच में उन्होंने बिना किसी तकलीफ के 64 ओवर फेंके। इसके बाद ही बीसीसीआई ने उन्हें फिट करार दिया और उनका चयन ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए हुआ। 

शास्त्री का बयान- चोट के साथ पहुंचे ऑस्ट्रेलिया
शास्त्री ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा था, ‘जडेजा के साथ समस्या यह थी कि कंधे में जकड़ने के कारण ऑस्ट्रेलिया आने के चार दिन बाद उन्होंने इंजेक्शन लिया था।’ उन्होंने कहा था, ‘इसका असर होने में कुछ समय लगा। जब वह भारत में थे तब भी उनके कंधे में जकड़न थी, लेकिन इसके बाद वह घरेलू क्रिकेट खेले। यहां ऑस्ट्रेलिया आने के बाद उन्होंने एक बार फिर यही परेशानी महसूस की और उन्हें इंजेक्शन दिया गया।’ उन्होंने साथ ही कहा- इसमें (जडेजा के उबरने में) उम्मीद से अधिक समय लगा और हम सतर्कता बरतना चाहते थे। आप यह नहीं चाहते कि पांच या 10 ओवर फेंकने के बाद कोई गेंदबाज बाहर हो जाए। 

आखिर क्यों उठे सवाल 
दरअसल, पर्थ टेस्ट के दौरान एक भी स्पेशलिस्ट स्पिनर को प्लेइंग इलेवन में नहीं रखने की गलती टीम इंडिया को भारी पड़ी। भारतीय टेस्ट इतिहास का यह केवल तीसरा टेस्ट मैच था जहां भारतीय टीम बिना किसी स्पेशलिस्ट स्पिनर के मैदान पर उतरी थी। दूसरी ओर, मेजबान ऑस्ट्रेलिया ने नाथन लियोन के रूप में स्पेशलिस्ट स्पिनर को मैदान पर उतारा और उन्होंने मैच में 8 विकेट चटकाकर अंतर पैदा कर दिया। यहीं सवाल उठने लगा कि आर. अश्विन चोटिल थे तो जडेजा को क्यों टीम में शामिल नहीं किया गया? 

मेलबर्न में है तीसरा टेस्ट 
दोनों टीमों के बीच मेलबर्न में तीसरा टेस्ट मैच 26 दिसंबर से खेला जाएगा। यहां यह देखना रोचक होगा कि भारतीय टीम कितने गेंदबाजों के साथ उतरती है। क्या यहां भी वह बगैर स्पिनर के उतरने वाला आत्मघाती फैसला करती है या किसी स्पिनर को टीम में शामिल करती है। भारत के पास आर. अश्विन और रविंद्र जडेजा के अलावा कुलदीप यादव भी ऑप्शन हो सकते हैं।