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‘कुश्ती महासंघ नहीं कर सकता हिंद केसरी का इस्तेमाल’ 

नई दिल्ली 
भारतीय शैली कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रामाश्रय यादव ने कहा कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) पारंपरिक शैली की राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन तो कर सकता है, लेकिन वह हिंद केसरी जैसे टाइटल का इस्तेमाल नहीं कर सकता। रामाश्रय ने भारतीय शैली कुश्ती महासंघ के महासचिव और द्रोणाचार्य अवार्डी रोशनलाल के साथ यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों महासंघों का संविधान अलग अलग है जिसमें यह स्पष्ट बता रखा है कि डब्ल्यूएफआई गद्दे पर कुश्ती कराता है और उनका संघ मिट्टी पर कुश्ती का आयोजन करता है।

उन्होंने कहा, “हमें इस बात से कोई एतराज नहीं है कि डब्ल्यूएफआई पहली पारंपरिक शैली की कुश्ती का आयोजन कर रहा है लेकिन हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वह हिंद केसरी, भारत केसरी और रूस्तमे हिंद जैसे टाइटल का इस्तेमाल नहीं कर सकता है।”

डब्ल्यूएफआई पहली बार 29 और 30 दिसंबर को महाराष्ट्र के पुणे में पहली पारंपरिक शैली की कुश्ती का आयोजन करने जा रहा है, जिसमें बताया गया था कि वह हिंद केसरी टाइटल देगा। भारतीय शैली कुश्ती महासंघ ने इसके खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में शरण ली थी जिसने यह फैसला दिया कि भारतीय शैली कुश्ती महासंघ ही ऐसे टाइटल का आयोजन कर सकता है।
भारतीय शैली कुश्ती महासंघ 1958 में अस्तित्व में आने के बाद से ही मिट्टी पर दंगलों का आयोजन कर रहा है और उसने इस शैली में 50 राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित की हैं जिनमें हिंद केसरी, भारत केसरी और रूस्तमे हिंद जैसे टाइटल दिए गए हैं। 

रामाश्रय ने कहा,“उच्च न्यायालय ने हमारे हक में फैसला दिया है कि हम ही हिंद केसरी जैसे टाइटल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह हैरानी की बात है कि हम 58 साल से ऐसी चैंपियनशिप का आयोजन कर रहे हैं और फेडरेशन हमें ही नकली करार दे रहा है जबकि वह इस तरह की पहली चैंपियनशिप का आयोजन कर रहा है और खुद को असली बता रहा है।”

द्रोणाचार्य अवार्डी रोशनलाल ने कहा, “मैं 1961 से मिट्टी की शैली की कुश्ती से जुड़ा हुआ हूं और हम ही इस तरह के टाइटल का आयोजन करते हैं। फेडरेशन चाहे तो किसी दूसरे नाम से अपनी चैंपियनशिप करा सकता है लेकिन हिंद केसरी नाम से नहीं। हम अपने किसी भी पहलवान को किसी भी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से नहीं रोकेंगे क्योंकि हम किसी पहलवान का नुकसान नहीं करना चाहते। लेकिन यदि फेडरेशन पहलवानों को हमारी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से रोकती है तो हम फिर अदालत की शरण में जाएंगे।”

रामाश्रय ने बताया कि 1958 में पहले हिंद केसरी बने रामचंद्र और देश के अन्य हिंद केसरी पहलवानों ने उनकी संस्था को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने बताया कि जनवरी-फरवरी में महाराष्ट्र के शोलापुर में उनका महासंघ अगले हिंद केसरी दंगल का आयोजन करेगा। रोशन ने बताया कि इस मामले में उनकी फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह से कोई बातचीत नहीं हुई है।