लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: टीम इंडिया की ‘दीवार’ कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ का आज 46वां जन्मदिन है. 16 साल के लंबे इंटरनैशनल क्रिकेट करियर में द्रविड़ ने हर वह भूमिका अदा की, जो टीम को जीत की दहलीज ले जाए. राहुल द्रविड़ कभी नियमित विकेटकीपर नहीं रहे, लेकिन टीम इंडिया को जब विकेटकीपर बल्लेबाज की जरूरत पड़ी तो उन्होंने वह भूमिका भी अदा की.
आइए जानते हैं, उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें …
राहुल द्रविड़ ने महज 12 वर्ष की आयु में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था. मराठी परिवार में जन्मे राहुल की परवरिश बेंगलुरु में हुई थी. उन्होंने अंडर-15, अंडर-17 से लेकर अंडर-19 तक के स्तर तक कर्नाटक टीम का प्रतिनिधित्व किया. 3 अप्रैल, 1996 को द्रविड़ ने टीम इंडिया के लिए पहला वनडे और इसी साल 20 जून को पहला टेस्ट मैच खेला. फिर यह सफर अनवरत अगले 16 बरसों तक जारी रहा.

मार्च 2012 में उन्होंने इंटरनेशनल और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की. वह 2012 में इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान भी थे.

द्रविड़ के पिता शरद द्रविड़ जैम की एक कंपनी चलाते हैं जिसकी वजह से राहुल द्रविड़ का उपनाम जेमी पड़ा है. उनकी मां पुष्पा बैंगलोर के यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग (UVCE) में आर्किटेक्चर की प्रोफेसर थीं. द्रविड़ का एक छोटा भाई है जिसका नाम विजय है. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ्स बॉयज हाई स्कूल, बैंगलोर में की और सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, बैंगलोर से वाणिज्य में डिग्री हासिल की. उन्हें सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में एमबीए की पढ़ाई के दौरान भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में चुना गया था॰ वह कई भाषाओं, मराठी, कन्नड़, अंग्रेजी और हिंदी के जानकर हैं.
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