आपको जानकारी के लिए बता दें कि हर दो-चार साल के अंतराल पर आईसीसी टूर्नामेंटों का आयोजन करती है। इनमें आईसीसी विश्व कप, आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी और आईसीसी टी-20 विश्व कप शामिल हैं। इन तीनों टूर्नामेंटों में से एक भी खिताब जीतना किसी भी क्रिकेट टीम के लिए गर्व की बात है। अब तक भारत, श्रीलंका, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान ऐसी क्रिकेट टीमें हैं, जो ये तीनों टूर्नामेंट जीत चुकी हैं। इस स्टोरी में हम आपको टीम इंडिया के उन 4 दिग्गज खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके नाम आईसीसी के तीनों टूर्नामेंट हैं।
1-महेंद्र सिंह धोनी
महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट इतिहास के श्रेष्ठ कप्तानों में शुमार किए जाते हैं। माही के नाम तीनों आईसीसी टूर्नामेंटों का ख़िताब है। धोनी की अगुवाई में साल 2007 में इंडियन टीम ने पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ 5 रनों से टी-20 विश्व कप का ख़िताब जीतने का गौरव हासिल किया।
ठीक इसके 4 साल बाद धोनी ने 2011 में टीम की अगुवाई करते हुए भारत को एक दिवसीय विश्वकप का खिताब दिलवाया था। 2011 के विश्वकप में धोनी का विजयी छक्का सभी को याद रहेगा। ठीक इसके दो साल बाद महेंद्र सिंह धोनी ने सहवाग, गंभीर, जहीर और हरभजन जैसे खिलाड़ियों की गैर-मौजूदगी में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर सबको चौंका दिया। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में महंगे साबित हो रहे इशांत शर्मा ने आखिरी ओवर में दो महत्वपूर्ण विकेट लेकर मैच का पासा ही पलट दिया।
2-युवराज सिंह
भारतीय टीम के विस्फोटक बल्लेबाज युवराज सिंह ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन करके अपने करियर में तीनों आईसीसी टूर्नामेंटों में भारत को विजयश्री दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है।दक्षिण अफ्रीका में खेले गए टी-20 विश्व कप में बतौर उप कप्तान युवराज सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ करो या मरो के एक मैच में गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में 6 छक्के लगाकर इतिहास रच दिया था। टी -20 में यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह दुनिया के एकमात्र बल्लेबाज हैं।
विश्वकप 2011 में युवराज सिंह ने बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया था। विश्व कप में उन्होंने चार बार मैन ऑफ द मैच तथा आखिर में मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट का भी पुरस्कार जीता। विश्वकप 2011 में युवराज सिंह ने कुल 9 मैचों में 362 रन बनाए थे तथा 15 विकेट भी हासिल किए थे।
2002 में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी में युवराज को केवल दो मैचों में बल्लेबाजी करने का मौका मिला था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल में युवराज सिंह ने महत्वपूर्ण 62 रनों की पारी खेली थी और एक विकेट भी हासिल किया था।
3-वीरेंद्र सहवाग
विश्व कप 2011 में वीरेंद्र सहवाग ने सचिन तेंदुलकर के साथ सलामी बल्लेबाज़ की भूमिका निभाई थी। बांग्लादेश के खिलाफ पहले ही मैच में वीरेंद्र सहवाग ने 175 रनों की तूफानी पारी खेली थी। चैंपियंस ट्रॉफी 2002 में सहवाग ने सबसे ज्यादा रन बनाए थे। उन्होंने इस टूर्नामेंट में 5 मैचों में 271 रन बनाए थे। भारत को पहली बार टी-20 विश्व कप जिताने में भी वीरू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
4- हरभजन सिंह
हरभजन सिंह टीम इंडिया में टर्बनेटर के नाम से जाने जाते हैं। यह गेंदबाज एक दशक से अधिक समय तक भारत का प्रमुख स्पिनर रहा। साल 2007 के टी-20 विश्व कप, आईसीसी विश्व कप 2011 तथा आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2002 में भी हरभजन सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई थी। सौरव गांगुली के नेतृत्व में भारत इस चैंपियंस ट्रॉफी में संयुक्त विजेता रहा था। चैंपियंस ट्रॉफी 2002 के फाइनल में हरभजन सिंह ने 27 रन देकर 3 विकेट चटकाए थे। हरभजन सिंह ने 2011 के विश्वकप में अपने 9 मैचों में 9 विकेट हासिल किए थे।
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