भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने मैच फिक्सरों पर तीखा हमला किया है. और उन सभी संदिग्ध मैच फिक्सरों के नाम मांगे हैं जिन्हें मुदगल समिति की रिपोर्ट ने सील कर दिया है, उनकी मांग हैं कि सभी नामों को सार्वजनिक किया जाए. माना जाता है कि जस्टिस मुकुल मुद्गल कमेटी द्वारा सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए एक सीलबंद लिफाफे में आठ क्रिकेटरों और एक लोकप्रिय कॉमेंटेटर के नाम शामिल हैं.
विनोद राय और डायना एडुल्जी की समिति ने सुप्रीम कोर्ट से माँगा था नाम

नवंबर 2018 में, विनोद राय और डायना एडुल्जी की समिति ने सुप्रीम कोर्ट से उन सभी 9 खिलाड़ियों के नामों का खुलासा करने के लिए कहा, जिन्हें मुद्गल समिति की रिपोर्ट में मैच और स्पॉट फिक्सिंग का संदेह था.
हर किसी को जानने की जरूरत है, देश को जानने की जरूरत है उस रिपोर्ट में किसका नाम है
“हर किसी को जानने की जरूरत है, देश को जानने की जरूरत है, और इसे जानना चाहिए. जिन लोगों ने ऐसा किया है, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए. मुझे लगता है कि यह एक लंबा समय हो गया है. अदालत को नाम सार्वजनिक करने की जरूरत है. अगर कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने गलत तरीके से कुछ किया है, उस जगह जहाँ लोग आपकी पूजा करते हैं, तो उन्हें दंडित किया जाना चाहिए. ”

उन्होंने यह भी कहा कि मोहम्मद अजहरुद्दीन को ईडन गार्डन्स में मैच शुरू होने से पहले घंटी बजाने की अनुमति देना गलत था, गंभीर ने बीसीसीआई, पर नवंबर में ट्विटर पर जमकर भड़ास निकाली थी, जिसमें कहा गया था अजहरुद्दीन का अतीत जानने के बावजूद घंटी बजाने की अनुमति दी गई थी.
बीसीसीआई ने अज़हरुद्दीन पर जीवन भर के लिए प्रतिबंध लगा दिया था
अज़हरुद्दीन खिलाड़ी में से एक थे, जिनका नाम हंसी क्रोन्ये ने किंग कमीशन की जाँच में रखा था. उन्होंने कहा था कि अज़हर ने उन्हें एक बुकी से मिलवाया था, जिन्होंने उन्हें दक्षिण अफ्रीका के भारत दौरे के दौरान 1996 के टेस्ट मैच में पैसा देने की पेशकश की थी. हालांकि अजहर ने दावों को गलत बताया था, लेकिन बीसीसीआई ने उन्हें जीवन भर के लिए प्रतिबंधित कर दिया था.बता दें, 2012 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अजहरुद्दीन पर प्रतिबंध हटा दिया गया था.

गंभीर ने अजहर के बारे में कहा,
” अजहर को घंटी बजाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी. ईमानदारी का एक रन बेईमानी के 10,000 रन से ज्यादा महत्वपूर्ण है मेरे लिए, 100 टेस्ट के लिए ईमानदारी से खेला जाने महत्वपूर्ण है. ना की बेईमानी के साथ. आईपीएल से पहले हर बार हमें एंटी-करप्शन पर ICC की बैठक में शामिल होना पड़ता था, जहाँ यह उल्लेख किया गया था कि कुछ निश्चित खिलाड़ियों के नाम हैं जो खेल के प्रति अपमानजनक हैं और अज़हर का नाम उन्ही खिलाड़ियों में आता था.
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