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कबड्डी की प्रगति खेल के लिए अच्छा संकेत: रिषांक

मुंबई
भारतीय कबड्डी टीम के सदस्य और प्रो कबड्डी लीग की यूपी योद्धा टीम के कप्तान रिषांक देवडिगा पिछले साल एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने में नाकाम रहने से मायूस तो हैं लेकिन उन्होंने दुनिया भर में इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता को कबड्डी के लिए अच्छा संकेत बताया। सात बार के गत चैम्पियन भारत को पुरुष सेमीफाइनल में ईरान के खिलाफ 18—27 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था और इन खेलों के इतिहास में भारतीय टीम पहली बार फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रही थी। इससे पहले टीम लीग चरण में दक्षिण कोरिया से भी हार गई थी जो इन खेलों के इतिहास में भारत की पहली हार थी।

देवडिगा ने यूपी योद्धा के साझेदार बीकेटी (बालकृष्णा इंडस्ट्रीज लिमिटेड) द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से कहा कि ईरान के खिलाफ हार का हमें दुख है। इससे पहले एशियाई खेलों में हमारा दबदबा रहा। लेकिन हमारी हार दर्शाती है कि खेल प्रगति कर रहा है। यह भारत के बाहर पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहा है और अन्य टीमें भी इस खेल को गंभीरता से ले रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले कबड्डी सिर्फ भारत में लोकप्रिय थी लेकिन अब हमें अन्य टीमों से भी चुनौती मिल रही है जो अच्छा संकेत है। हम इससे सबक लेंगे और अगले एशियाई खेलों में पूरी तैयारी के साथ उतरेंगे। रिषांक ने कहा कि भारत में पहले जिले और राज्य स्तर पर खेले जाने वाला यह खेल अब दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि हम पहले जिला और राज्य स्तर पर कबड्डी खेलते थे लेकिन अब यह दुनिया भर में पहचान बना रही है। पीकेएल को दुनिया भर में देखा जाता है और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कबड्डी टूर्नामेंट हो रहे हैं।

तेलुगु टाइटंस के स्टार राहुल चौधरी ने उम्मीद जताई कि एशियाई खेलों के बाद कबड्डी को ओलंपिक में भी जगह मिलेगी। चौधरी ने कहा कि उम्मीद करते हैं कि कबड्डी को ओलंपिक में भी जगह मिलेगी। अगर ऐसा होता है तो और अच्छे खिलाड़ी सामने आएंगे तथा खिलाड़ी और कड़ी मेहनत करेंगे और भारत के लिए पदक जीतने का प्रयास करेंगे। बीकेटी ने पीकेएल के 2018 सत्र में 12 में से आठ टीमों के साथ साझेदारी की थी जिसमें यूपी योद्धा के अलावा मौजूदा चैंपियन बेंगलुरू बुल्स, तीन बार का चैंपियन पटना पाइरेट्स, पुणेरी पल्टन, तमिल थलाइवास, तेलुगु टाइटंस, दबंग दिल्ली और हरियाणा स्टीलर्स शामिल हैं।