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आचरेकर सर के उस थप्पड़ ने बताया था सचिन के जीवन का मार्ग

 नई दिल्ली
सचिन तेंडुलकर के कोच और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता रामाकांत आचरेकर का मंगलवार को मुंबई में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। सचिन के अलावा आचरेकर ने विनोद कांबली और प्रवीण आमरे जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के भी मेंटॉर रहे। सचिन ने एक बार अपने मेंटॉर के बारे में बताया था, 'मेरे लिए असली क्रिकेट की शुरुआत तब हुई जब मैं 11 साल का था। मेरे भाई को मुझमें कोई प्रतिभा नजर आई और वह मुझे आचरेकर सर के पास ले गए। मेरे विकास में उनके साथ गुजारे वो चार-पांच साल मेरे लिए काफी अहम रहे।' 
 
सचिन ने कहा था कि आचरेकर सर पेड़ के पीछे खड़े होकर हमारा खेल देखा करते थे और बाद में हमारी गलतियां बताया करते थे। वह काफी मजाक जरूर करते थे लेकिन हम पर पूरी नजर भी रखते थे। सचिन ने कहा था, 'आचरेकर' सर ने मुझे मैच टैंपरामेंट से परिचित करवाया था। मेरे भाई अजीत मुझे इसलिए उनके पास लेकर गए थे क्योंकि वह अपने स्टूडेंट्स को ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस मैच खिलाया करते थे।' 
 

सचिन ने एक बार बताया था कि कैसे आचरेकर सर के एक थप्पड़ ने उनकी जिंदगी बदल दी थी। उन्होंने बताया था कि स्कूल खत्म करने के बाद वह अपनी मौसी के घर लंच करने जाते थे। इस बीच सर उनके लिए कुछ मैच ऑर्गनाइज करवाया करते थे। वह सामने वाली टीम को बता देते थे कि मैं चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करूंगा। 
 
सचिन ने बताया था, 'ऐसे ही एक दिन मैच खेलने के बजाए मैं वानखेड़े स्टेडियम में शारदाश्रम इंग्लिश मीडियम और शारदाश्रम मराठी मीडियम के बीच हैरिस शील्ड का फाइनल देखने चला गया। मैं अपनी टीम का हौसला बढ़ाने वहां गया था। मैंने वहां सर को देखा और उन्हें मिलने चला गया। उन्हें पता था कि मैं मैच खेलने नहीं गया लेकिन उन्होंने फिर भी पूछा कि मैंने कैसा प्रदर्शन किया। मैंने उन्हें बताया कि मैं मैच छोड़कर अपनी टीम का हौसला बढ़ाने यहां आया हूं। इतना सुनना था कि उन्होंने मुझे एक जोरदार थप्पड़ लगाया। मेरे हाथ का लंच बॉक्स छूट कर दूर गिरा। सारा सामान फैल गया।' 

सचिन ने बताया था, 'उस समय सर ने मुझे कहा था, 'तुम्हें दूसरों के लिए तालियां नहीं बजानी हैं। ऐसा खेलो कि लोग तुम्हारे लिए तालियां बजाएं।' उस दिन के बाद मैंने काफी मेहनत की और घंटों प्रैक्टिस करता रहा। अगर उस दिन ऐसा नहीं होता तो शायद मैं स्टैंड में बैठकर लोगों की हौसल अफजाई ही करता रहता।'