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1983 वर्ल्ड कप के हीरो अपनी बायोपिक के लिए चाहते हैं ज्यादा मनी

मुंबई
कपिल देव की कप्तानी में 1983 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचने वाली टीम इंडिया के खिलाड़ियों पर इस वर्ल्ड जीत की खास बायोपिक बन रही है। लेकिन अपने जीवन और इस वर्ल्ड कप की यादों से जुड़ी जो कहानियां इन खिलाड़ियों ने फिल्म निर्माताओं को सुनाई हैं। उसके बदले में मिलने वाले पैसे से वे खुश नहीं हैं। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को मालूम चला है कि इस वर्ल्ड कप विनिंग टीम के सदस्यों ने इस चिंता को लेकर मुंबई में एक बैठक की है। इन पूर्व खिलाड़ियों ने वर्ल्ड कप की यादों से जुड़ी अपनी जो कहानियां फिल्म निर्माताओं को सुनाई हैं, उनके ऐवज में उन्हें 1.5 करोड़ रुपये की राशि मिली है। यानी जब टीम के 10 खिलाड़ियों में यह कुल राशि बांटी जाएगी, तो प्रति खिलाड़ी के हिस्से में सिर्फ 1.5-1.5 लाख रुपये ही आएंगे। सूत्रों ने बताया, 'आप उन खिलाड़ियों की बात कर रहे हैं, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिए पहली बार सबसे बड़ी ट्रोफी जीती थी। यह 1983 वर्ल्ड कप ही था, जिसने सबकुछ बदल कर रख दिया। उसके ऐवज में यह राशि बहुत 'तुच्छ' है।' 

यह भी जानकारी मिली है कि कपिल देव, जो इस विश्व विजेता टीम के कप्तान थे, उनका फिल्मा निर्माताओं के साथ एक अलग करार है। वहीं टीम के दूसरे दिग्गज खिलाड़ी सुनील गावसकर ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इस फिल्म के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया है। कपिल की कप्तानी में जब यह टीम वर्ल्ड कप 1983 के लिए इंग्लैंड गई थी, तो उस टीम में सुनील गावसकर, मोहिंदर अमरनाथ, कृष्णमचारी श्रीकांत, बलविंदर संधू, सैयद किरमानी, सुनील वाल्सन, मदन लाल, संदीप पाटिल, रोजर बिन्नी, कीर्ति आजाद, यशपाल शर्मा और रवि शास्त्री टीम का हिस्सा थे।