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इतिहास के पन्नो से : जब अपने पहले ही शतक से धोनी ने गेंदबाज को अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर मजबूर किया

साल 2001 भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी तब बिहार के लिए खेला करते थे.रणजी ट्रॉफी के फाइनल लीग मैच में बिहार का मुकाबला बंगाल से था. इस मैच में बंगाल कि टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 608 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर बना दिया.बिहार का पहला लक्ष्य फॉलोआन बचाना था.

उस समय धोनी गेंद का धागा खोलने में माहीर थे.लेकिन जब वो मैदान पर बल्लेबाजी करने आएं. तब बिहार की हालत थोड़ी खस्ता थी.बिहार ने अपने पांच विकेट 228 रन पर खो दिए थे. फिर वहां से एक अलग ही धोनी देखने को मिला.धोनी ने चार घंटे और 206 गेंदों का सामना किया और 17 चौके 1 छक्के की मदद से 114 रन बनाएं.

धोनी का प्रथम क्षेणी क्रिकेट में पहला शतक था

ये धोनी का प्रथम क्षेणी क्रिकेट में पहला शतक था. इस मैच में बंगाल की तरफ से एक हरफनमौला खिलाड़ी खेल रहा था. नाम लक्ष्मी रतन शुक्ला. उस समय भारतीय टीम की तरफ से इस खिलाड़ी ने तीन एक दिवसीय मैच भी खेल रखे थे. इनके एक ओवर में धोनी ने तीन चौके जड़ दिएं. इसके बाद बंगाल का ये गेंदबाज आगबबूला हो गया.

धोनी को बीमर फेंका और फिर गालियां देना शुरू कर दिया

पहले उसने धोनी को बीमर फेंका और फिर गालियां देना शुरू कर दिया.धोनी ने इसकी शिकायत अंपायर से की. मैदान पर बात इतनी बिगड़ गई की बंगाल के कप्तान को इस खिलाड़ी को मैदान से बाहर करना पड़ा. अगले दिन मैच जब शुरू हुआ उस दिन भी लक्ष्मी रतन शुक्ला मैदान पर नहीं उतरे.

इस दिन एक युवा खिलाड़ी का उदय हुआ. तो वहीं एक प्रतिभा से भरे खिलाड़ी को लोगों ने अपने नजरों से उतार दिया था.

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