महेंद्र सिंह धोनी को 2007 में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया था, इस समय टीम इंडिया बुरे दौर से गुजर रही थी. 2007 विश्वकप में भारतीय टीम पहले चरण में ही बाहर हो गई थी. इस दौरान भारतीय टीम ने कई सीरीज भी गंवा दी थी. टी -20 विश्व कप और तीन स्टार अनुभवी खिलाड़ी – सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, और राहुल द्रविड़ भी उस समय टीम में नहीं थे.

एमएस धोनी को टीम का कप्तान नियुक्त किया. इस, दौरान भारतीय टीम ने टी-20 विश्वकप जीता. धोनी टीम इंडिया के लिए सबसे सफल कप्तान बन गए. उन्होंने कई क्रिकेटरों के करियर को भी बचाया, जिन पर उन्हें काफी विश्वास था.
इशांत शर्मा-

ईशांत शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत 2008 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में धमाकेदार प्रर्दशन के साथ की. कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज़ ने उन्हें फ्रंट लाइन गेंदबाज के रूप में स्वीकार किया, जिसकी भारत को ज़रूरत थी.
लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, इशांत अपनी लय खो बैठे. उनका इकोनाॅमी रेट भी खराब हो गया, चयनकर्ताओं ने भी कई बार उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
धोनी ने इशांत को टीम में शामिल करने के लिए जोर दिया. इस समय वह टेस्ट टीम के स्थायी सदस्य है. 184 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में, उन्होंने 253 विकेट लिए है. इस समय वह टीम की रीढ़ की हड्डी बनकर उभरे हैं.
चेतेश्वर पुजारा

चेतेश्वर पुजारा को 2010 में घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रर्दशन करने का पुरुस्कार मिला और वह राष्ट्रीय टीम में शामिल हो गए. इस दौरान कुछ अच्छी पारियों द्वारा उन्होंने टीम प्रबंधन को आकर्षित किया, लेकिन वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सके. उस समय जब चयनकर्ता पुजारा को टीम से बाहर करने की सोच रहे थे, उस सम धोनी ने विश्वास जताकर पुजारा का समर्थन किया.
धोनी को पुजारा के अंदर राहुल द्रविड़ की झलक दिखाई दे रही थी. आज पुजारा टीम इंडिया के लिए सबसे भरोसेमंद टेस्ट मैच खिलाड़ी हैं और 68 टेस्ट मैचों में उन्होंने 5,426 रन बनाए हैं.
रवींद्र जडेजा

रवींद्र जडेजा ने अपने करियर की शानदार शुरुआत नहीं की. 2010 टी-20 विश्वकप के बाद जडेजा और कुछ खिलाड़ी सेंट लूसिया की एक पब घटना में शामिल थे, जिसके बाद उनके करियर पर विराम ही लगने वाला था, लेकिन धोनी ने जडेजा का समर्थन किया. आज वह दुनिय़ा के बेस्ट आलराउंडरों में शुमार हैं.
रोहित शर्मा-

रोहित शर्मा ने जब राष्ट्रीय टीम में डेब्यू किया, तो उस समय क्रिकेट प्रेमियों को लगा कि वह एक सफल खिलाड़ी के रुप में कीर्तिमान स्थापित करेंगे, लेकिन उन्होंने दिए गए मौकों को सही से नहीं भुनाया. जिससे उनके करियर पर संकट के बादल मंडराने लगे.
2012 में श्रीलंका के दौरे पर पांच मैचों में मात्र 13 रन बनाए, जिसके बाद वह टीम से बाहर कर दिए, 2013 में चैंपियंस ट्राफी के दौरान धोनी ने रोहित शर्मा के ऊपर फिर विश्वास जताया, इसके बाद रोहित शर्मा ने अपने करियर में मुड़कर नहीं देखा, आज वह वनडे टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी है.
विराट कोहली-

भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान ने प्रेस कांफ्रेस में कई बार इस बात को स्वीकारा है कि धोनी ने उनकी हर बात का समर्थन किया है, यहां तक कि उन्होंने हमारे करिय़र को भी बचाने में उनका हाथ रहा.
शुरुआती दौर में जब कोहली का बल्ला शांत था, तो उनके चय़न को लेकर सवाल उठ रहे थे, उस समय धोनी ने समर्थन कर टीम से बाहर होने से बचाने में अहम भूमिका निभाई थी. आज विराट कोहली विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में शुमार हैं.
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