Halo !!! Saya Kang Ismet, ini adalah blog tentang AMP HTML dan cara penerapannya

आईपीएल की शान बढ़ाने के लिए इन देशो से बुलाई जाती हैं चीयरलीडर्स, विवादों का भी रही हैं हिस्सा

2008 में आईपीएल तो आया पर उसको और आकर्षक बनाने के लिए उसके साथ चीयरलीडर्स भी पहली बार क्रिकेट में आई और धीरे- धीरे दर्शको को लुभाने लगी. आईपीएल की बढ़ती लोकप्रियता का एक कारण इसमें चीयरलीडर्स का होना भी बताया जाता है. चीयरलीडर्स हर आईपीएल टीम के पास होती है जो टीम का उत्साह बढाती है. चीयरलीडर्स खिलाड़ियों के चौका, छक्का मारने पर और साथ ही साथ विकेट लेने पर भी टीम के थीम सॉंग पर डांस के मूव्स दिखा कर खिलाड़ियों का प्रोत्साहन करती है.

शुरुआत में चीयरलीडर्स का बहुत हुआ था विरोध

2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई तो उसके साथ पहली बार क्रिकेट जगत में चीयरलीडर्स का आगमन हुआ. शुरू में चीयरलीडर्स का बहुत विरोध किया गया क्योंकि चीयरलीडर्स छोटे- छोटे कपड़ो में आकर्षक डांस मूव्स करती थी. विरोध के बाद कुछ टीमों ने अपने चीयरलीडर्स को अपने राज्य के पारंपरिक वेश में पेश करना शुरू कर दिया और उनके डांस को भी स्थनीय डांस में बदल दिया. लेकिन ये फ़ॉर्मूला अधिक दिनों तक नहीं चला और फिर से चीयरलीडर्स छोटे और आकर्षक कपड़ो में टीम के थीम सॉंग पर ही डांस करने लगी.

फिक्सिंग का भी चीयरलीडर्स को ही माना गया जिम्मेदार और लगाया गया बैन

आईपीएल के छठे सीजन में जब फिक्सिंग नाम आईपीएल में आया तो कई लोगों ने इसकी वजह चीयरलीडर्स को ही माना और इनपर बैन लगाने की मांग करने लगे. जिसके बाद बीसीसीआई के तत्कालीन प्रमुख एन. श्रीनिवासन की जगह जगमोहन डालमिया प्रमुख बने तो उन्होंने इस पर बैन लगा दिया लेकिन ये भी ज्यादा दिन नहीं चल पाया और चीयरलीडर्स की दोबारा आईपीएल में वापसी हो गयी.

आईपीएल पार्टी का भी बनती हैं हिस्सा

चीयरलीडर्स धीरे-धीरे आईपीएल की पार्टी का भी हिस्सा बनने लगी हालाकि उसके लिए इनको अलग से पैसे दिए जाते है. चीयरलीडर्स को सिर्फ़ एक मैच का ही 6000 से 10000 तक दिया जाता है जिसके बाद आईपीएल पार्टी का पैसा इनको अलग से मिलता है.

इन देशो से आती है आईपीएल में चीयरलीडर्स

अगर चीयरलीडर्स के देशो की बात करे तो ये आईपीएल में नार्वे, साऊथ अफ्रीका, बेल्जियम, रूस और यूक्रेन से आती है. चीयरलीडर्स आमतौर पर सिर्फ़ 2 या 3 महीने के लिए ही आती है पर कुछ यही पर और भी प्रोग्राम में शामिल होकर पैसे कमाने लगती है. चीयरलीडर्स को अब भारत में खेले जा रहे अन्य लीग का भी हिस्सा बन रही है.

खेलों में 1970 में ही आ गयी थी चीयरलीडर्स

चीयरलीडर्स का खेलों में इतिहास देखे तो ये 1970 में ही आ गयी थी जब अमेरिका फुटबॉल लीग में पहली बार चीयरलीडर्स का क्रेज शुरू हुआ. उसके बाद धीरे- धीरे चीयरलीडर्स को बास्केटबॉल,बेसबॉल, आइस हॉकी,कुश्ती,बॉक्सिंग और क्रिकेट में भी लाया गया.

चीयरलीडर्स की भी होती है पढाई

अमेरिका में है चीयरलीडर्स की पढाई के लिए केंद्र बने हुए है. जहा पर इनको ट्रेनिंग दिया जाता है. इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. अमेरिका में तो इसका बिजनेस भी होता है. सालभर में इसकी कमाई करोड़ों में होती है. चीयरलीडर बनने के लिए प्रोफेशनल डांसर होने के साथ-साथ जिमनास्ट आना भी जरुरी होता है. इस प्रोफेशन को बहुत ही ख़तरनाक माना जाता है. कुछ देशों में तो इसे खेल का भी दर्जा दिया गया है.

The post आईपीएल की शान बढ़ाने के लिए इन देशो से बुलाई जाती हैं चीयरलीडर्स, विवादों का भी रही हैं हिस्सा appeared first on Sportzwiki.