नयी दिल्ली
ओलंपिक कोटा हासिल करने वाली युवा निशानेबाज मनु भाकर का मानना है कि इसे हासिल करने से ज्यादा मुश्किल उनके लिए अपने प्रदर्शन को निरंतर रखना रहा है। सत्रह साल की इस भारतीय खिलाड़ी ने हाल ही में म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ विश्व कप में चौथा स्थान हासिल कर 2020 ओलंपिक के लिए भारत का सातवां ओलंपिक कोटा हासिल किया था। भाकर ने कहा कि ओलंपिक कोटा हासिल करना इस बात का संकेत है कि उन्होंने जो पहचान बनायी थी वह अब भी बरकरार है। उन्होंने कहा कि तोक्यो के लिए कोटा हासिल करने से ज्यादा मुश्किल अपने स्कोर (खेल) को निरंतर रखना है। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह सकती कि मैं राहत की सांस ले रही हूं क्योंकि आगे मुश्किलें बढ़ने वाली है। मुझे लगता है लय और स्कोर बरकरार रखना, कोटा हासिल करने से ज्यादा मुश्किल है। भारतीय राष्ट्रीय राइफल महासंघ की नीति के मुताबिक ओलंपिक के लिए खिलाड़ी का चयन प्रतियोगिता और चयन ट्रायल के स्कोर के आधार पर होता है। इस कोटा को हासिल करने से दो दिन पहले मनु को निराशा हाथ लगी थी जब 25 मीटर स्पर्धा में उनकी पिस्टल खराब हो गई और उन्हें पांचवें स्थान से संतोष करना पड़ा।
विश्व कप, राष्ट्रमंडल खेलों और युवा ओलंपिक में स्वर्ण में स्वर्ण पदक जीतने वाली मनु ने कहा कि पिस्टल का खराब होना मेरे हाथ में नहीं था। मुझे उससे उबरना था और मैं उसे भूलकर अपने अगले मुकाबले पर ध्यान दे रही थी। मनु भारत के लिए एक और ओलंपिक कोटा हासिल करके खुश हैं लेकिन उन्होंने माना की म्यूनिख विश्व कप उनके लिए सबसे मुश्किल था। उन्होंने कहा कि म्यूनिख में प्रतियोगिता सबसे कठिन थी क्योंकि उसमें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाज पदक के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। इसलिए यह और भी ज्यादा संतोष देने वाला था।