महेंद्र सिंह धोनी का आज 38वां जन्मदिन है। धोनी इन दिनों टीम इंडिया के साथ इंग्लैंड में वर्ल्ड कप मिशन पर हैं। रांची की गलियों से भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान तक धोनी ने एक लंबा सफर तय किया है। अब वह टीम में युवा खिलाड़ियों के मेंटॉर की भूमिका में अधिक नजर आ रहे हैं। उन्होंने बचपन में काफी संघर्ष किया। उनका परिवार एक कमरे के मकान में रहता था। शायद बचपन के संघर्ष से ही उनके अंदर जीत का जज्बा और धैर्य मिला।
धोनी ने सौरभ गांगुली की कप्तानी में अपने इंटरनैशनल करियर की शुरुआत की। उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ चिट्टगांव में पहली बार टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनी। लेकिन माही इस मैच में 0 रन बनाकर रन आउट हुए।
पाकिस्तान की टीम भारत दौरे पर थी। यहां सीरीज के दूसरे वनडे मैच में ही तब के कप्तान गांगुली ने उन्हें तीसरे नंबर पर बैटिंग के लिए भेजा। इससे पहले लंबे-लंबे छक्के जड़ने में धोनी का खूब नाम था लेकिन इंटरनैशनल क्रिकेट में अभी तक वह ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे। लेकिन यहां मिले मौके को उन्होंने हाथों-हाथ लिया और 123 बॉल में 148 रन ठोककर भारतीय टीम का स्कोर 300 के पार पहुंचा दिया। इस पारी से धोनी ने टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की कर ली। यह उनके वनडे करियर का 5वां मैच था।
साल 2005 में श्रीलंका के खिलाफ जयपुर में खेले एक मैच में भारत 299 रन के टारगेट का पीछा कर रहा था। एक बार फिर धोनी को नंबर 3 पर मौका मिला और उन्होंने यहां 50 ओवर विकेटकीपिंग करने के बाद मैच के अंत तक बैटिंग की और 183 रन ठोक डाले। धोनी का यह स्कोर आज भी उनका वनडे क्रिकेट में सर्वोच्च स्कोर है।
पहली बार टी20 वर्ल्ड कप खेला जा रहा था और महेंद्र सिंह धोनी ने कप्तानी कौशल से यहां इतिहास रच दिया। भारत न सिर्फ इस पहले वर्ल्ड टी20 के फाइनल में पहुंचा बल्कि उसने अपने चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराकर इस खिताब पर कब्जा भी जमाया।