नई दिल्ली
वर्ल्ड कप-2019 में मिली हार को अभी 2 सप्ताह भी नहीं हुए हैं, जिस टीम इंडिया को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, उसे न्यू जीलैंड के खिलाफ शिकस्त झेलनी पड़ी। इंग्लैंड की मेजबानी में खेले गए वर्ल्ड कप से लौटने के बाद टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने पहली बार कई मामलों पर खुलकर अपनी राय रखी। भारतीय कप्तान विराट कोहली अब भारत में हैं और अपने व्यस्त रूटीन, जिम और शूट में समय बिता रहे हैं। उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को खास इंटरव्यू दिया।
नाकामयाबी से सीखा बहुत
टीम इंडिया के कैप्टन विराट कोहली ने कहा है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में हार और नाकामयाबी से काफी कुछ सीखा है। उन्होंने कहा, 'बुरे वक्त ने मुझे ना केवल आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया बल्कि एक इंसान के तौर पर भी मुझमें सुधार हुआ। इससे मुझे खराब दौर की अहमियत सफलता से ज्यादा महसूस हुई। इससे मुझे लगा कि बैठकर सोचें कि अब क्या करने की जरूरत है और अपने लिए रोडमैप तैयार करें।'
ऐसे समय में टीम को समझाना
उन्होंने कहा, 'खराब दौर में हम टीम से बात करते हैं। तब मैं कहता हूं कि जिस तरह का प्रदर्शन आपने किया, उस पर गर्व होना चाहिए। सबसे जरूरी है कि आप अपने किए पर विनम्र रहें लेकिन उसी पल आप खुद को इतना भी कम ना मानें कि आपकी सराहना ही ना हो। इसमें बैलेंस बेहद जरूरी है।'
मेहनत करना जरूरी
विराट ने कहा कि मेहनत करना जरूरी है। उन्होंने कहा, 'यदि आप छोड़ दें तो आपका सफर समाप्त। इसमें कोई विकल्प नहीं है। आपको मेहनत करनी होती है, उन्हीं चीजों को दोबारा से करना होता है। नियमितता और सफलता कुछ नहीं है, बल्कि उन्हीं चीजों को दोहराना होता है।'
उन्होंने कहा, 'उदाहरण के तौर पर आप गोल्फ को देखें, जहां एक प्लेयर कोई शॉट बार-बार लगाता है। फिर भले ही यूएस ओपन चैंपियंस ही क्यों ना हों, एक ही चीज को बार-बार करते हैं क्योंकि वह भी जानते हैं कि प्रेशर में एक वही बात होती है जिस पर भरोसा किया जा सकता है।'
जिंदगी का यही लक्ष्य
विराट ने कहा, 'एक पेशेवर क्रिकेटर के लिए यह खेल ही सब कुछ होता है। मेरी जिंदगी में लक्ष्य वही है जो मुझे और मेरी पत्नी का हमारे परिवारों ने पालन-पोषण किया, वही हम चाहते हैं। वही चीजें हमारी प्राथमिकता बन जाती हैं। आपको यह समझना होगा कि यह सब एक दिन तो खत्म होना है।'
धर्म पर बोले विराट
विराट ने कहा, 'मैं कोई धार्मिक व्यक्ति नहीं हूं और कभी किसी धर्म से बंधकर नहीं रहा। मैं खुले दिल से सभी धर्मों का सम्मान करता हूं और हर तरह के लोगों को स्वीकार करता हूं। मुझे लगता है कि सभी आध्यात्मिक होते हैं, हमें कभी-कभी यह महसूस नहीं होता लेकिन हम सभी एक समान हैं।'
नए खिलाड़ियों से करते हैं बातचीत
टीम में नए खिलाड़ियों से ज्यादा बातचीत को लेकर विराट ने कहा, 'ऋषभ पंत, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर जैसे युवा खिलाड़ी शानदार हैं। उनमें गजब का आत्मविश्वास है। मैंने पहले भी कई बार कहा है कि 19-20 साल की उम्र में जिस तरह का आत्मविश्वास होता है, उनमें कहीं ज्यादा है। प्रतिभा बड़े टूर्नमेंट में खेलने से निखरती है जैसे आईपीएल। वे अपनी गलतियों से बहुत जल्दी सीखते हैं।'
चेंज रूम में नहीं डांटने वाला माहौल
विराट कोहली ने कहा, 'डांटने वाला माहौल तो अब चेंज रूम में भी नहीं है। जितना दोस्ताना व्यवहार मेरा कुलदीप यादव के साथ है, वैसा ही महेंद्र सिंह धोनी के साथ है। माहौल ऐसा है कि कोई भी अपनी बात किसी से कह सके। मैं खुद कह सकता हूं- देखो ये गलतियां मैंने की हैं, तुम मत करना।'