नई दिल्ली
श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम कहीं आगे की सोच के साथ मैदान में उतरेगी। टीम इंडिया इस मुकाबले में उतरते वक्त बर्मिंघम में खेले जाने वाले सेमीफाइनल के बारे में सोच सकती है। लेकिन श्रीलंका का पूरा फोकस इसी मैच पर होगा। उसका इस टूर्नामेंट में सफर निराशाजनक और हताश करने वाला रहा है। हालांकि, इस टीम से सेमीफाइनल में पहुंचने की अधिक उम्मीद थी भी नहीं, लेकिन इंग्लैंड पर जीत के बाद उससे अपेक्षाएं थोड़ी बढ़ गईं थीं।
तैयारी दुरुस्त करे भारत : भारतीय टीम इस मैच का इस्तेमाल बर्मिंघम की तैयारी के लिए करना चाहेगी। सेमीफाइनल में बाउंड्री का साइज ठीक-ठाक रहेगा यह मुकाबला सेंटर पिच पर खेला जाएगा। श्रीलंका के खिलाफ लीड्स में होने वाले मैच में भी बाउंड्री का साइज ऐसा ही रहने की उम्मीद है।
बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए मुकाबले के बाद कप्तान विराट कोहली ने स्वीकार किया था कि उन्होंने मैदान के आकार को देखते हुए टीम का चयन किया था।
केदार की वापसी संभव : अगर केदार जाधव अंतिम एकादश में वापसी करते हैं तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा। बेशक उन्होंने अभी तक महज छह ओवर ही गेंदबाजी की है, लेकिन वह भारत की पांच गेंदबाजों की योजना के हिसाब से अच्छे विकल्प हैं।
तीन तेज गेंदबाजों के साथ मैदान पर उतरने का फैसला हमेशा पारंपरिक होता है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि भारतीय टीम इस बारे में गंभीरता से विचार कर रही है। खासतौर पर हार्दिक पांड्या के प्रदर्शन को देखते हुए। मगर मेरा मानना है कि श्रीलंका के खिलाफ भारत को वही टीम उतारनी चाहिए जो वो सेमीफाइनल में उतारना चाहता है।
कोहली से शतक की आस : भारतीय टीम की इच्छाओं की सूची में सबसे पहली मांग विराट कोहली का शतक होगी। पांच अर्धशतकों से कुछ लोगों को खुशी हो सकती है और विराट खुद भी कह चुके हैं कि वे खुश हैं कि ये अर्धशतक टीम के लिए काफी अहम थे। मगर जब आप दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हों तो अर्धशतकों को शतक में तब्दील न कर पाना निराश करता है।
मैं लसिथ मलिंगा को विश्व कप में आखिरी बार गेंदबाजी करते देखने को लेकर भी काफी उत्सुक हूं। बिना मलिंगा के योगदान के श्रीलंकाई टीम पटरी से उतरी हुई लगती। मैं अविष्का फर्नांडो की बल्लेबाजी देखने का भी इंतजार कर रहा हूं। यह एक शानदार अभियान रहा है और भारतीय टीम को लीग चरण का अंत एक और बढ़िया जीत के साथ करना चाहिए।