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कोयले से हीरे निकलने जैसा था इस क्रिकेटर का सफर, बाप के सपने को तोड़कर बना महान क्रिकेटर

आज के इस आर्टिकल में हम आप लोगों को भारतीय क्रिकेट टीम के एक ऐसे खिलाड़ी के बारे में बताने वाले आए जिसके पत्नी को पूरा करने के लिए उनके पूरे परिवार ने मेहनत किया है।

आज के इस आर्टिकल में हम आप लोगों को भारतीय क्रिकेट टीम के कई खिलाड़ी के बारे में बताने वाले हैं जो अपने पिता के सपने को पूरा नहीं कर सका तो आज देश का नाम रोशन कर रहा है। जैसा की आप सभी को पता है कि क्रिकेटर बनना हर किसी के बस की बात नहीं है लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसा होता है कि करना हम कुछ और चाहते हैं और एक क्रिकेटर बन जाते हैं कुछ ऐसा ही हुआ इस खिलाड़ी के साथ।

आज के इस आर्टिकल में हम आप लोगों को जिस खिलाड़ी के बारे में बता रहे हैं उस खिलाड़ी का नाम उमेश यादव है। उमेश यादव उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वह नागपुर के निकट खापरखेड़ा के वेस्टर्न कोल लिमिटेड की कॉलोनी में रहते थे। उमेश यादव के पिता तिलक यादव वहीं पर कोयले की खान में काम करते थे। यहीं पर उमेश यादव की परवरिश हुई थी।

उमेश यादव के पिता चाहते थे कि उमेश पुलिस या फिर सेना में जाए। लेकिन कई बार विफल होने के बाद उन्होंने स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट खेलना शुरू कर दिया। 2011 में उमेश यादव की मां किशोरी देवी का मधुमेह की बीमारी से निधन हो गया था। उमेश यादव की मां का दवाई का खर्चा उनके परिवार के जरूरत से ज्यादा हो गया था। उमेश यादव के लिए यह लाइन बिलकुल सटीक बैठती है कि उनका क्रिकेट करियर कोयले से हीरा निकालने जैसा था।



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