
खेल डेस्क। पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने भारतीय टीम को शिखर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हीं की कप्तानी में भारतीय टीम दो विश्व कप (टी-20 और वनडे) जीतने में सफल रही है।लम्बे समय से भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे महेन्द्र सिंह धोनी ने अब मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर अपना नजरिया पेश किया है।
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खेलों में शीर्ष प्रदर्शन हासिल करने के लिए मानसिक अनुकूलन कार्यक्रम पेश कर रही पहल एमफोर का समर्थन करते हुए भारत की विश्व चैम्पियन टीम के कप्तान रह चुके धोनी ने स्वीकार किया कि उन पर दबाव और डर का प्रभाव पड़ता है।
एमफोर की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के हवाले से कहा कि कोई भी असल में यह नहीं बोलता है कि जब मैं बल्लेबाजी के लिए जाता हूं तो पहली 5 से 10 गेंदों तक मेरी धडक़न बढ़ी होती है, दबाव महसूस करता हूं, मैं थोड़ा डरा हुआ भी होता हूं, क्योंकि सभी इसी तरह महसूस करते हैं।
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गौरतलब है कि पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी भी एकदिवसीय क्रिकेट में दस हजार से अधिक रन बना चुके हैं। वह टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, जबकि सीमित ओवरों के अन्तरराष्ट्रीय मैचों पर किसी भी प्रकार का निर्णय नहीं लिया है। वह टेस्ट क्रिकेट में भी पांच हजार के करीब रन बना चुके हैं।