नई दिल्ली
2003 के एडिलेड टेस्ट को फैन्स शायद ही भूल पाए हों। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार बड़ी जीत हासिल की था। उस टेस्ट मैच में 19 साल के इरफान पठान ने डेब्यू किया था। उन्होंने अपनी स्विंग गेंदबाजी से सबको चौंका दिया था। इरफान सबसे तेज 100 वनडे विकेट लेने वाले खिलाड़ी बने। 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ ली गई हैट्रिक भारतीय क्रिकेट इतिहास के यादगार पल हैं। 2007 के टी20 वर्ल्ड कप में फाइनल में वह 'मैन ऑफ द मैच' रहे। उन्होंने 4 ओवर में 16 रन देकर 4 विकेट लिए थे। यही वह समय था जब बल्लेबाजी की क्षमताएं भी पठान ने दिखाईं। बड़ौदा का यह खिलाड़ी जल्द ही कपिल देव के रिटायरमेंट के बाद खाली हुई ऑल राउंडर की जगह भरने के लिए तैयार हो गया।, लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था।
महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में उन्हें टीम में जगह नहीं मिल पाई। इरफान ने कहा, ''जहां तक उपलब्धियों का सवाल है तो ये कहीं अधिक हो सकती थी। मेरा मानना है कि मैं बेस्ट ऑल राउंडर साबित हो सकता था, लेकिन मैं बहुत ज्यादा क्रिकेट नहीं खेल पाया। भारत के लिए मेरा आखिरी मैच 27 साल की उम्र में खेला गया मैच साबित हुआ। जबकि मैं लोगों को 35-37 की उम्र तक खेलते देखता हूं।''
उन्होंने आगे कहा, ''इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन को ही देख लीजिए।'' उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि अगर मैं 35 साल की उम्र तक खेलता तो हालात बेहतर होते। लेकिन अब सब बीत चुका है। मैंने जितने भी मैच खेले मैच-विनर की तरह खेले। मैं ऐसे खिलाड़ी के तौर पर खेला जिसने अंतर पैदा किया। अगर मैंने सिर्फ एक विकेट लिया (मैच का पहला विकेट) इसने टीम पर काफी अंतर डाला। मैंने बल्ले से जितनी भी पारियां खेलीं, मैंने अंतर पैदा करने के लिए खेलीं।''
पठान ने कहा, ''मुझे दुख होता है जब लोग सिर्फ आंकड़ों पर ध्यान देते हैं। यदि आप देखें, मैंने पहले 59 वनडे में नई गेंद से गेंदबाजी की। इससे आपका माइंडसेट बनता है। जब आप पहले बदलाव के रूप में गेंदबाजी करने आते हैं तो आप डिफेंसिव गेंदबाजी करते हैं। कप्तान और कोच के अनुरूप। आपका मकसद रन रोकना होता है। तब आप एक अलग गेंदबाज बन जाते हैं।''
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि वो सिर्फ नई गेंद से ही विकेट ले सकते थे, वो पुरानी गेंद से भी गेंदबाजी कर सकते थे। लेकिन क्रिकेट एक टीम गेम है और जब इसमें आपका रोल बदलता है तो उससे फिर आपके आंकड़ों पर भी काफी फर्क पड़ता है।
इरफान ने यह भी कहा कि उन्हें टीम प्रबंधन से सपोर्ट नहीं मिला। टीम प्रबंधन को यह कहना चाहिए था कि हां, इरफान का प्रयोग विकेट लेने के लिए किया जाना चाहिए। पठान ने टीम में ऐसे खिलाड़ियों की उपयोगिता को जरूरी बताया जो फ्लेक्सिबल हों। जो कहीं भी खेल सकते हों, किसी भी जगह गेंदबाजी कर सकते हों।
जब धोनी कप्तान थे तो वह बल्लेबाजी क्रम में बहुत लचीले थे। उनके आंकडे अच्छे थे, लेकिन जब वह लचीले नहीं रहे तो उनके आंकड़े उतने अच्छे दिखाई नहीं देंगे। इसलिए खिलाड़ी को लचीला ही होना चाहिए। इरफान ने अपना अंतिम मैच 2012 के टी-20 वर्ल्ड कप में खेला था। यह भी दिलचस्प है कि श्रीलंका के खिलाफ खेले अपने अंतिम मैच में उन्होंने पांच विकेट लिए थे। इसके बाद चोट की वजह से उन्हें बाहर होना पड़ा। पठान जम्मू-कश्मीर घरेलू टीम के कोचिंग स्टाफ में शामिल हैं। 2018 में वह इससे जुड़े थे।