

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट इतिहास में 'संकटमोचक' शब्द सुनते ही राहुल द्रविड़ की तस्वीर जेहन में तैरने लगती है। चाहे वन-डे क्रिकेट हो या फिर टेस्ट मैच 'जैमी' हर बार टीम को विपरित हालातों से निकालने का काम करते। हर वो जिम्मेदारी संभालते जो उन्हें सौंपी जाती, लेकिन क्या आप जानते हैं तीसरे क्रम पर खेलने वाले सर्वकालिक महान बल्लेबाजों की सूची में शूमार राहुल द्रविड़ भी कभी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे।

हाल ही में भारतीय महिला टीम के कोच और पूर्व क्रिकेटर डब्ल्यूवी रमन के यूट्यूब चैनल 'इनसाइड आउट' पर इस महान बल्लेबाज ने अपने करियर के उस 'बुरे दौर' पर भी बात की। बकौल द्रविड़, '1998 में मुझे वन-डे क्रिकेट से बाहर कर दिया गया था। मुझे अपनी वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ा था। मैं तब एक साल तक भारतीय क्रिकेट से बाहर रहा था। मैं सोचने लगा था कि क्या वाकई मैं वन-डे क्रिकेट खेलने लायक हूं भी या नहीं।

द्रविड़ ने कहा कि वह थोड़े भाग्यशाली भी रहे कि अपने करियर के अंत में वह इंडियन प्रीमियर लीग की टीम राजस्थान रायल्स में कप्तान-सह-कोच की भूमिका निभा रहे थे। द्रविड़ ने भारतीय महिला टीम के कोच डब्ल्यू वी रमन को उनके यूट्यूब चैनल ‘इनसाइड आउट’ में कहा, ‘‘खेलना बंद करने के बाद (संन्यास लेने के बाद) बहुत ही कम विकल्प थे और मुझे पता नहीं चल रहा था कि क्या करना चाहिए. तो कपिल देव ही थे जिन्होंने मुझे सलाह दी और ऐसा मेरे करियर के अंत के दौरान ही हुआ था.
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