

स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय क्रिकेट में इन दिनों कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते खेल का ऑफ सीजन चल रहा है। चार महीन से ज्यादा समय बीत चुका है कि टीम इंडिया के खिलाड़ी इस महामारी के चलते अपने-अपने घरों में बंद हैं। पिछले काफी समय से सौरव गांगुली और एमएस धोनी की कप्तानी को लेकर आपस में तुलना हो रही है. इन दोनों के बीच अंतर को पिछले दिनों गौतम गंभीर ने अपने ही तरीके से बयां किया था. लेकिन अब यह सवाल पूछने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है कि बतौर कप्तान सौरव गांगुली का भारतीय क्रिकेट पर ज्यादा असर रहा या फिर एमएस धोनी का? अब इस बारे में विकेटकीपर पार्थिव पटेल ने अपने विचार स्टार स्पोर्ट्स के एक कार्यक्रम में रखे।

सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट टीम के दो सबसे सफल कप्तान रहे हैं। गांगुली 2000 के दशक की शुरुआत में भारतीय क्रिकेट टीम में नई क्रांति लाए। उन्होंने बहुत आत्मविश्वास के साथ एक टीम का निर्माण किया, जो दुनिया के कुछ बेहतरीन विरोधियों को चुनौती दे सकती थी। गांगुली के कप्तानी छोड़ने के बाद धोनी ने टीम इंडिया की कमान संभाली। धोनी की कप्तानी में भारत ने तीन आईसीसी ट्रॉफी (2007 टी-20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी) जीतीं। धोनी दुनिया के इकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने आईसीसी के तीनों बड़े टूर्नामेंट जीते हों। ऐसे में हमेशा यह सवाल उठता है कि किस कप्तान का भारतीय क्रिकेट पर अधिक प्रभाव पड़ा है? इस पर अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने अपनी राय दी है।

पार्थिव पटेल का मानना है कि सौरव गांगुली ने धोनी की तुलना में भारतीय क्रिकेट में अधिक योगदान दिया। स्टार स्पोर्ट्स के शो 'क्रिकेट कनेक्टड' में जब पार्थिव पूछा गया तो उन्होंने धोनी नहीं, सौरव गांगुली को सबसे प्रभावी भारतीय कप्तान चुना। पटेल ने गांगुली की कप्तानी में अपना डेब्यू बतौर टीनेजर किया था। उन्होंने कहा, ''इन दोनों कप्तानों के बीच कंपीटिशन सही है। एक कप्तान ने बहुत सारी ट्रॉफियां जीती हैं, जबकि दूसरे कप्तान ने टीम निर्माण किया है। जब सौरव गांगुली कप्तान बने, उसके बाद 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम काफी मुश्किल समय से गुजर रही थी।'' उन्होंने कहा कि वह गांगुली ही थे, जिन्होंने मैच फिक्सिंग स्कैंडल के बाद टीम को बाहर निकाला और नई ऊर्जा भरी।
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