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कोटला में जेटली की मूर्ति पर विवाद, इन दिग्गज खिलाड़ियों की लगी हैं स्टेडियमों में प्रतिमा

स्पोर्ट्स डेस्क। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली 1999 से 2013 के बीच 14 साल तक डीडीसीए अध्यक्ष रहे। क्रिकेट संघ उनकी याद में कोटला पर छह फुट की प्रतिमा लगाने की सोच रहा है। इससे पहले डीडीसीए ने 2017 में मोहिंदर अमरनाथ और बिशन सिंह बेदी के नाम पर स्टैंड्स का नामकरण किया था। देश के दिग्गज नेताओं में शुमार अरुण जेटली 1999 से 2013 के बीच 14 साल तक डीडीसीए अध्यक्ष रहे। अब डीडीसीए जेटली की याद में कोटला स्टेडियम में उनकी छह फुट की प्रतिमा लगाने पर विचार कर रहा है। इसे लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी खफा हो गए हैं। उन्होंने डीडीसीए से इस्तीफा भी दे दिया है। एक टीवी चैनल से बातचीत में बेदी ने कहा कि मेरे जमीर ने जो कहा, 'मैंने कर दिया. एक क्रिकेट ग्राउंड में एक नेता का बुत बनाना शोभा नहीं देता है. यह बात मेरे जेहन में उतर नहीं रही है. मैंने उन्हें बुत लगाने से रोक नहीं रहा हूं.


मेरा कहना है कि मेरा नाम बस वहां से हटा दीजिए. दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (DDCA) पर बरसते हुए 74 साल के बेदी ने भाई भतीजावाद और ‘क्रिकेटरों से ऊपर प्रशासकों को रखने’ का आरोप लगाते हुए संघ की सदस्यता भी छोड़ दी. उन्होंने डीडीसीए के मौजूदा अध्यक्ष और अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली को लिखे पत्र में कहा, ‘मैं काफी सहनशील इंसान हूं, लेकिन अब मेरे सब्र का बांध टूट रहा है. डीडीसीए ने मेरे सब्र की परीक्षा ली है और मुझे यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया. बेदी ने कहा, ‘तो अध्यक्ष महोदय मैं आपसे मेरा नाम उस स्टैंड से हटाने का अनुरोध कर रहा हूं, जो मेरे नाम पर है और यह तुरंत प्रभाव से किया जाए. मैं डीडीसीए की सदस्यता भी छोड़ रहा हूं.जेटली 1999 से 2013 के बीच 14 साल तक डीडीसीए अध्यक्ष रहे. क्रिकेट संघ उनकी याद में कोटला पर छह फुट की प्रतिमा लगाने की सोच रहा है. डीडीसीए ने 2017 में मोहिंदर अमरनाथ और बेदी के नाम पर स्टैंड्स का नामकरण किया था.बेदी ने कहा, ‘मैंने काफी सोच समझकर यह फैसला लिया है.

मैं सम्मान का अपमान करने इवालों में से नहीं हूं. लेकिन हमें पता है कि सम्मान के साथ जिम्मेदारी भी आती है. मैं यह सुनिश्चित करने के लिए सम्मान वापस कर रहा हूं कि जिन मूल्यों के साथ मैंने क्रिकेट खेला है, वे मेरे संन्यास लेने के चार दशक बाद भी जस के तस हैं.बेदी ने कहा, ‘मैं इस मामले में बहुत सख्त हूं. शायद काफी पुराने ख्याल का. लेकिन मैं भारतीय क्रिकेटर होने पर इतना फख्र रखता हूं कि चापलूसों से भरे अरुण जेटली के दरबार में हाजिरी लगाना जरूरी नहीं समझता था.उन्होंने कहा, ‘फिरोजशाह कोटला मैदान का नाम आनन-फानन में दिवंगत अरुण जेटली के नाम पर रख दिया गया, जो गलत था. लेकिन मुझे लगा कि कभी तो सदबुद्धि आएगी. लेकिन मैं गलत था. अब मैंने सुना कि कोटला पर अरुण जेटली की मूर्ति लगा रहे हैं. मैं इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता.



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