

नई दिल्ली. टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज युवराज सिंह ने पिछले साल दलित समाज को लेकर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इसमें केस खारिज करने और हांसी पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है. इसी मामले पर गुरुवार को चंडीगढ़ में सुनवाई होगी. युवराज पर कोर्ट की सख्ती के बाद हरियाणा पुलिस ने एससी-एसटी ( SC-ST Act)के तहत हांसी थाने में केस दर्ज किया था.

बता दें कि वकील और नेशनल अलायंस और दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कलसन ने पिछले साल 2 जून को युवराज के खिलाफ हांसी थाने में एक शिकायत दी थी. इसमें उन पर दलितों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए थे. लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी उनके खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी. इसे लेकर कलसन कोर्ट गए थे. कोर्ट की सख्ती के बाद हांसी पुलिस ने इस क्रिकेटर के खिलाफ आईपीसी एवं एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली थी. इसके बाद से ही उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी. अब इससे बचने के लिए युवराज ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उधर, रजत ने कहा कि वे इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे और युवराज को गिरफ्तार करने की मांग करेंगे.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, बीते साल जून महीने में युवराज सिंह भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के साथ लाइव वेब चैट कर रहे थे तभी उन्होंने जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया था. इंस्टाग्राम पर लाइव चैट में युवराज और रोहित बात कर रहे थे. इस दौरान युवराज ने युजवेंद्र चहल पर जातिसूचक टिप्पणी की थी, जिसके बाद काफी बवाल मचा था. लोगों की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर बकायदा #युवराजसिंहमाफी_मांगो टॉप ट्रेंड में रहा. इसके बाद युवराज को माफी तक मांगनी पड़ी थी.
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