

भारत और इंग्लैंड के बीच हुए पहले वनडे में डेब्यू कर क्रुणाल पांड्या ने धूम मचा दी। क्रुणाल ने 26 गेंदों में शानदार अर्धशतक ठोंक कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। मैच से पहले और अपनी पारी के बाद क्रुणाल पांड्या छोटे भाई हार्दिक से लिपटकर खूब रोए। क्रुणाल तो इतने भावुक हो गए कि प्रजेंटेशन सेरेमनी के दौरान एक शब्द तक नहीं बोल सके। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी पारी दिवंगत पिता को समर्पित की। क्रुणाल ने हार्दिक से बात करते हुए इंटरव्यू में कहा, पापा हमारे साथ ड्रेसिंग रूम में थे। जिस दिन पापा हमें छोड़कर गए, उस दिन मैं सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का मैच खेलने वाला था, लेकिन पिता की मौत की खबर ने मुझे झकझोर दिया। उस दिन भी वह हमेशा की तरह हमारे साथ होने वाले थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
???? Our father was with us in dressing room: Pandya brothers @hardikpandya7 interviews @krunalpandya24 post his emotional knock on ODI debut. This has all our heart ????- By @RajalArora #TeamIndia #INDvENG @Paytm
— BCCI (@BCCI) March 24, 2021
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उन्हें आदत थी कि जब भी हमारा मैच होता, वह कपड़े, हैट और जूते का बैग तैयार रखते। क्रुणाल ने कहा, कल मैं उन्हें अपना साथ रखने के लिए बड़ौदा से उनका वह बैग साथ ले आया। मैंने ऐसा इसलिए किया ताकि वह हमारे साथ रहें। इस पर हार्दिक ने हमारे करियर में ऐसा पहली बार हुआ, जब पिता हमारे साथ 'ड्रेसिंग रूम' में थे। हार्दिक ने पूछा, आपको कैसा लगा, जब आपको पहली वनडे कैप दी गई? इस पर क्रुणाल ने कहा, ये सपने के सच होने जैसा था। मैंने यहां तक आने के लिए बहुत मेहनत की है। विशेष तौर पर पिछले डेढ़ दो महीने में मैंने यहां तक आने के लिए खूब प्रयास किया। मेरी डाइट, फिटनेस को लेकर मैंने काफी मेहनत की।
This is all heart ????????
— BCCI (@BCCI) March 23, 2021
A teary moment for ODI debutant @krunalpandya24 post his brilliant quick-fire half-century????????@hardikpandya7 #TeamIndia #INDvENG @Paytm pic.twitter.com/w3x8pj18CD
ये सब कुछ पिता को समर्पित है, उनके आशीर्वाद की वजह से ही सब कुछ मुमकिन हुआ। क्रुणाल ने हार्दिक से कहा, तुमसे डेब्यू कैप लेना, बहुत भावुक क्षण था। मंगलवार की पारी निरंतर सीखने की एक प्रक्रिया है। परिणाम चाहे अच्छा हो या बुरा, मैं प्रयास करने से नहीं चूकना चाहता। मुझे अपने आपको अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने का मौका देना है। पिता भले ही 16 जनवरी की सुबह हमें छोड़कर चले गए, लेकिन उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहेगा
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