

दुनिया के महान बल्लेबाजों में शुमार वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज ब्रायन लारा (Brian Lara) ने कई बार अपनी टीम के लिए 'संकटमोचक' की भूमिका निभाई. वह जब क्रीज पर जम जाते थे, तो किसी भी गेंदबाज के लिए उनका विकेट लेना मुश्किल होता था. इतना ही नहीं, वह गेंद को हर दिशा में भेजने की काबिलियत रखते थे. लारा और उनके फैंस के लिए 30 मार्च का दिन काफी यादगार होगा क्योंकि साल 1999 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी टीम को मुश्किल परिस्थितियों से उबारा और जीत भी दिलाई. 26 मार्च 1999 से ब्रिजटाउन में शुरू हुए सीरीज के इस तीसरे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 490 रन बनाए. कप्तान स्टीव वॉन ने 199 और रिकी पोंटिंग ने 104 रन का योगदान दिया. दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 281 रन की विशाल साझेदारी की. इसके बाद वेस्टइंडीज टीम ने शेरविन कैंपबेल (105) के शतक और रिडली जैकब्स (68) के अर्धशतक की मदद से 329 रन बनाए. दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई टीम 146 रन पर सिमट गई जब उसके बल्लेबाजों को पेसर कर्टनी वॉल्श ने काफी परेशान किया और 39 रन देकर 5 विकेट झटके.

मुकाबले में वेस्टइंडीज को जीत के लिए 308 रन का लक्ष्य मिला. कैंपबेल (33) और एड्रियन ग्रिफिथ (35) ने शुरुआत तो अच्छी की और पहले विकेट के लिए 72 रन जोड़े लेकिन फिर विकेट गिरने का सिलसिला चला और आधी टीम 105 रन तक पवेलियन लौट गई. पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी को उतरे ब्रायन लारा (153*) ने ऐसा संभाला कि जीत ही दिलाकर दम लिया. लारा ने जिमी एडम्स (38) के साथ 133 रन की साझेदारी की जो मुश्किल परिस्थितियों से उबारने में काफी अहम रही.

लारा ने 256 गेंदों की अपनी नाबाद पारी में 19 चौके और एक छक्का लगाया. टीम के 6 बल्लेबाज तो दहाई का आंकड़ा नहीं छू सके, जिसके बावजूद लारा ने धैर्य नहीं खोया और जीत की तरफ कदम बढ़ाते रहे. वेस्टइंडीज ने 9 विकेट पर 311 रन बनाए और 120.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया. ऑस्ट्रेलिया के पेसर ग्लेन मैकग्रा ने दूसरी पारी में 92 रन देकर 5 विकेट झटके जबकि जेसन गिलेस्पी को तीन विकेट मिले.
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