नई दिल्ली
ओलंपिक में सीधे क्वालिफाई करने वाले भारत के पहले तैराक साजन प्रकाश टोक्यो में पिछले पांच साल के अनुभव के सहारे हासिल लय को जारी रखना चाहते हैं।
इस दौरान उन्होंने रियो खेलों और एशियाई खेलों के जरिए दबाव का सामना करना भी अच्छी तरह सीखा है। उनका मानना है कि भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं लेकिन ज्यादा स्पर्धाएं होनी चाहिएं।
पिछले महीने उन्होंने सेटे कोली ट्रॉफी में 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में 1:56: 38 के समय से ए मानक हासिल कर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया। ओलंपिक के लिए क्वालिफाइंग मार्क 1:56: 48 था।
साजन कहते हैं, ‘पांच साल पहले मैं रियो में था और मैंने 1: 59:3 का समय निकाला था। अब यह 1: 56 :3 है। मैंने इस दौरान तीन सेकंड का समय कवर किया है। यह बात सेकंडों की नहीं है। इस दौरान मैंने प्रशिक्षण में काफी कुछ सीखा है। अपने पहले ओलंपिक और एशियाई खेलों से अनुभव हासिल किया है।
उन्होंने कहा कि टोक्यो में मैं अपने उसी अनुभव का इस्तेमाल करूंगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय तैराकों में निरंतरता के अभाव पर उन्होंने कहा कि पूरी प्रणाली होती है, यह संयुक्त प्रयास होते हैं, जिन्होंने मुझे आज इस मुकाम पर खड़ा किया है।
आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि अन्य भारतीय तैराकों में प्रतिभा नहीं है लेकिन उनके पास अवसरों का अभाव हो सकता है। हमारे पास सीनियर स्तर पर दो प्रतियोगिताएं हैं और ये अपने को परखने के लिए काफी नहीं हैं। यदि सरकार और मदद करे साथ ही खेल वैज्ञानिक और बायोमैकेनिक्स सभी एक लक्ष्य को लेकर चलें तो भविष्य में और अच्छे बदलाव आएंगे।
साजन कहते हैं कि टोक्यो में मेरा लक्ष्य अपने समय में 0.5 सेकंड का सुधार करना है। यदि मैं 1:55: 8 का समय निकाल पाया तो सेमीफाइनल में पहुंच सकता हूं। यदि मैं फिर इसी लय को जारी रख पाया तो फाइनल में भी पहुंच सकता हूं।
दिसंबर 2019 से मार्च 2020 तक प्रकाश चोट से उबर रहे थे। इस दौरान उन्होंने ज्यादा तैराकी नहीं की। उनके फीजियो और कोच ने उन्हें फिट होने में मदद की। उन्होंने कहा कि मार्च में रिहैब के बाद मैं जून-जुलाई तक थाईलैंड में लॉकडाउन में था। लगभग आठ महीने स्वीमिंग पूल में नहीं उतर पाया। एक तरह से फिर से शुरुआत करनी पड़ी। कदम दर कदम आगे बढ़े और यह मेरे कोच का समपर्ण है जो मैं यहां तक पहुंच पाया।
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