स्पोर्ट्स डेस्क. हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) का लाइसेंस खो गया है. हम लाइसेंस टू किल की बात कर रहे हैं. हार्दिक की बल्लेबाज़ी में अब वो आक्रामकता नहीं दिख रही है जो पहले हुआ करती थी. सनराइजर्स हैदराबाद (Sunrisers Hyderabad) के खिलाफ मैच में उनकी ये परेशानी साफ़ दिखाई दी. क्योंकि उन्होंने 50 रन बनाने के लिए 42 गेंद का सामना किया. उनकी पारी में चार चौके और एक छक्का शामिल है. यानी उन्होंने 22 रन तो पांच गेंद पर ही बना लिए थे- बाकि 28 रन बनाने के लिए उन्होंने 37 गेंद खेली।सनराइज़र्स हैदराबाद ने गुजरात टाइटन्स (Gujarat Titans) को पांच गेंद पहले ही आठ विकेट के बड़े अंतर से हराया. इस मैच में गुजरात के कप्तान हार्दिक पंड्या ने अर्धशतक लगाया. लेकिन उनकी पारी टीम के लिए नाकाफ़ी थी।
* गेंदबाज़ी ऐक्शन में हार्दिक पंड्या ने किया बदलाव :
2021 टी20 विश्व कप में तो टीम में उनकी जगह को लेकर तनातनी भी हुई. मीडिया ने कप्तान विराट कोहली से सीधे सीधे सवाल किया. विराट ये कहकर सवाल से बचे कि निचले क्रम में हार्दिक की बल्लेबाज़ी भी टीम के लिए काफ़ी उपयोगी है. हालांकि विराट की बात किसी को पची नहीं. अब हार्दिक पंड्या टीम के कप्तान हैं. उन्हें पता है कि उनकी उपयोगिता तभी है जब वो गेंदबाज़ी भी करें।

इसके लिए उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी ऐक्शन में बदलाव किया है. अब वो गेंदबाज़ी करते समय अपने हाथ को अपेक्षाकृत सीधा रखते हैं जिससे कमर पर कम से कम दबाव पड़े. करियर को लंबा चलाने के लिए जो इंजरी मैनेजमेंट खिलाड़ियों को सीखना होता है वो हार्दिक को भी आ गया है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि करियर लंबा खींचना ज़रूरी है या फिर मैच विनर की इमेज को क़ायम रखना?
हार्दिक पंड्या जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आए तो जल्दी ही उनकी तुलना कपिल देव से की जाने लगी. पंड्या 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से गेंदबाज़ी करते थे. साथ ही निचले क्रम में बेख़ौफ़ बल्लेबाज़ी. लेकिन ख़राब फ़िटनेस की वजह से वो अपनी जगह ज़्यादा समय तक बचा नहीं पाए. उनके बाहर होने के बाद टीम इंडिया में विजय शंकर और शार्दुल ठाकुर जैसे विकल्प भी आ गए. बड़ी मेहनत मशक़्क़त के बाद जब हार्दिक पंड्या टीम में लौटे तो वो सिर्फ़ बल्लेबाज़ी कर रहे थे. कई मैच ऐसे थे जहां उन्होंने गेंदबाज़ी नहीं की।
* क्या कप्तानी की वजह से छिन गया लाइसेंस टू किल :
ये सवाल लगातार गर्म है कि क्या हार्दिक पांड्या की बल्लेबाज़ी में आया बदलाव कप्तानी की वजह से है. पहले टीम का कप्तान हार्दिक पंड्या को ये कहकर ही क्रीज़ पर भेजता था कि वो जाएं और हर गेंद को बाउंड्री पार भेजने की कोशिश करें. हार्दिक ऐसा करते भी थे. मुंबई इंडियंस के लिए लंबे समय तक वो निचले क्रम के ख़तरनाक बल्लेबाज़ों में शुमार रहे. लेकिन कप्तानी मिलने के बाद हार्दिक पंड्या ज़िम्मेदारी से बल्लेबाज़ी करना चाह रहे हैं।
हम अति आक्रामकता की वकालत नहीं कर रहे लेकिन ये सवाल तो उठता ही है क्या कप्तानी हाथ आते ही खिलाड़ी की सोच बदल जाती है. इसी तरह की बहस ऋषभ पंत के इर्द गिर्द भी चल रही है. जो दिल्ली की टीम के कप्तान हैं. पंत भी अब पारी के अंत तक क्रीज़ पर टिकना चाहते हैं।
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